नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस को लेकर सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है. अब लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और निरीक्षण के लिए अलग- अलग विभागों से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी. सरकार ने जिला स्तर पर एकीकृत सिंगल विंडो प्रणाली शुरू की है. पूरी प्रक्रिया ई- डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए ऑनलाइन होगी. उन्होंने कहा कि नई एसओपी से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित होगी. मुख्यमंत्री के मुताबिक एसओपी वर्ष 2015 में ही तैयार हो चुकी थी, लेकिन तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार के समय इसे लागू नहीं किया गया.

नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस देने का अंतिम फैसला जिला लाइसेंसिंग समिति (डीएलसी) करेगी. समिति के अध्यक्ष डीसी/ डीएम होंगे. इसमें पुलिस, फायर, नगर निगम/डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और जिला चिकित्सा अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे.
पोर्टल पर अपलोड
सिनेमाघरों के निरीक्षण के लिए जिला निरीक्षण समिति (डीआईसी) बनाई गई है. एसडीएम के नेतृत्व में यह समिति संयुक्त निरीक्षण करेगी. निरीक्षण के बाद ई-साइन और जियोटैग्ड एकीकृत रिपोर्ट तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी. सरकार के अनुसार आवेदन की प्रारंभिक जांच 7 कार्यदिवस में पूरी की जाएगी. इसके बाद निरीक्षण के लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया गया है.
निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद डीएलसी को 30 दिनों के भीतर लाइसेंस पर निर्णय लेना होगा. यदि निर्धारित समय में फैसला नहीं लिया जाता है और डीआईसी की रिपोर्ट में सभी वैधानिक और सुरक्षा मानक पूरे पाए जाते हैं, तो लाइसेंस स्वतः जनरेट हो जाएगा. नई व्यवस्था में पुलिस से लाइसेंस जारी करने का अधिकार भी हटा दिया गया है.
मॉक ड्रिल पर जोर
नई एसओपी में सिनेमाघरों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है. इसके तहत हर साल संयुक्त निरीक्षण के साथ औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे. पुलिस, डीडीएमए और सिनेमाघर प्रबंधन की भागीदारी से साल में दो मॉक ड्रिल कराने का प्रावधान किया गया है. शिकायतों के समाधान के लिए ऑनलाइन व्यवस्था होगी. गंभीर मामलों को मंडलायुक्त के स्तर तक ले जाने का प्रावधान रखा गया है. सरकार का कहना है कि नई एसओपी से सिनेमाघरों के लाइसेंस की प्रक्रिया सरल होने के साथ सुरक्षा मानकों की निगरानी भी बेहतर होगी. यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के उपहार सिनेमा त्रासदी से जुड़े निर्देशों के अनुपालन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.