नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली की हवा को साफ रखने वाले रिज क्षेत्र में आने वाले दिनों में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड (डीआरएमबी) की उच्चस्तरीय स्थायी समिति पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील रिज क्षेत्र में विकास और निर्माण से जुड़े 34 बड़े प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा कर रही है. इन परियोजनाओं में निजी निर्माण से लेकर सरकारी और संरक्षण से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं.

इनमें सबसे अहम मामला राष्ट्रपति भवन के गेट नंबर 28 के सामने स्थित प्रेसिडेंट्स बाडीगार्ड (PBG) परेड ग्राउंड की करीब 12.6 हेक्टेयर जमीन के इस्तेमाल का है. इसमें 7.58 हेक्टेयर अधिसूचित संरक्षित रिज क्षेत्र आता है. इस जमीन का इस्तेमाल सेना की प्रशिक्षण जरूरतों के लिए किए जाने की योजना है.
पर्यावरण पर असर
दिल्ली रिज को राजधानी का प्राकृतिक एयर-फिल्टर माना जाता है. यह वायु प्रदूषण को कम करने के साथ तापमान नियंत्रित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में रिज क्षेत्र में बड़े स्तर पर निर्माण, खुदाई या पेड़ों की कटाई का सीधा असर पर्यावरण और दिल्ली की हवा पर पड़ सकता है. डीआरएमबी की समीक्षा में बुद्धा जयंती पार्क के पुनर्विकास और संजय वन में संरक्षण कार्य से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं. वसंत कुंज, वसंत विहार, ग्रेटर कैलाश पार्ट- 2, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, कैलाश कॉलोनी, ईस्ट पटेल नगर और मल्कागंज जैसे इलाकों में निजी निर्माण और री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की भी जांच की जा रही है.
10 प्रोजेक्ट्स का होगा ग्राउंड सर्वे
29 जुलाई को हुई बोर्ड बैठक में समिति ने 34 प्रस्तावों में से 10 प्रमुख प्रोजेक्ट्स को जमीनी निरीक्षण के लिए चुना है. इनमें चार परियोजनाओं का निरीक्षण समिति खुद करेगी जबकि छह अन्य प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण मुख्य वन संरक्षक और समिति के सदस्य 20 अगस्त से पहले पूरा करेंगे. निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित निर्माण को रिज क्षेत्र से बाहर किसी वैकल्पिक जमीन पर किया जा सकता है या नहीं. साथ ही खुदाई, चट्टानों की कटाई और ढलान की स्थिरता से पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा.
अनिवार्य निरीक्षण
नियमों के मुताबिक 100 से अधिक पेड़ काटने या एक हेक्टेयर से ज्यादा रिज भूमि के इस्तेमाल वाले प्रस्तावों पर समिति के सभी सदस्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण करना जरूरी होगा. वहीं, रिज क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर भी डीडीए को सख्त निर्देश दिए गए हैं. डीडीए को साउथ सेंट्रल, नॉर्थ और नानकपुरा रिज से अतिक्रमण हटाने तथा सीमांकन की स्थिति पर चार सप्ताह के भीतर ताजा रिपोर्ट देने को कहा गया है.