गुरुग्राम | नई पीढ़ी (Gen Z) के काम करने के तरीके और अपनी बात रखने के अंदाज ने कॉर्पोरेट कल्चर में भी बदलाव लाना शुरू कर दिया है. अब कर्मचारी छुट्टी लेने के लिए बीमारी या किसी अन्य वजह का बहाना बनाने के बजाय सीधे अपनी परेशानी बताने से नहीं हिचक रहे हैं. गुरुग्राम की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मैचमेकिंग कंपनी के फाउंडर ने लिंक्डइन पर एक ऐसा ही अनुभव साझा किया.

उन्होंने बताया कि उनकी टीम की एक महिला कर्मचारी ने हाल ही में छुट्टी के लिए ईमेल किया. खास बात यह थी कि कर्मचारी ने बीमारी का कोई बहाना बनाने के बजाय साफ तौर पर बताया कि वह पीरियड पेन की वजह से काम करने की स्थिति में नहीं है.
नहीं आ पाऊंगी ऑफिस
महिला कर्मचारी ने ईमेल में लिखा, “हेलो सर, मुझे मासिक धर्म में बहुत तेज दर्द, ऐंठन और बेचैनी हो रही है इसलिए मैं आज ऑफिस नहीं आ पाऊंगी. अगर कोई जरूरी बात हो तो मैं ईमेल और फोन पर उपलब्ध रहूंगी.” फाउंडर के मुताबिक, कर्मचारी की इस स्पष्टता और ईमानदारी ने उन्हें प्रभावित किया. उनका कहना था कि कर्मचारी ने अपनी व्यक्तिगत परेशानी को बिना किसी झिझक के सीधे सामने रखा और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जरूरी काम होने पर वह ईमेल और फोन के जरिए उपलब्ध रहेगी.
पहले नहीं था ऐसा माहौल
फाउंडर ने अपनी पोस्ट में करीब एक दशक पहले के ऑफिस कल्चर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय ऐसे विषयों पर खुलकर बात करना आसान नहीं था. किसी महिला कर्मचारी को पीरियड्स के दौरान परेशानी होने पर भी वह सीधे इसकी जानकारी देने से बचती थी. इसके बजाय पेट दर्द, बुखार या सिरदर्द जैसी वजह बताकर छुट्टी मांगी जाती थी. उनके अनुसार, कार्यस्थल पर पीरियड्स को लेकर झिझक और एक तरह का पर्दा बना रहता था. कर्मचारी अपनी वास्तविक समस्या बताने के बजाय उसे छिपाना बेहतर समझते थे.
ज्यादा डायरेक्ट
फाउंडर ने कहा कि आज की जेन जी लगभग हर मुद्दे पर ज्यादा डायरेक्ट और स्ट्रेटफॉरवर्ड है. वे अपनी जरूरत, परेशानी और सीमाओं के बारे में स्पष्ट तरीके से बात करते हैं. यही बदलाव धीरे- धीरे कॉर्पोरेट वर्कप्लेस के माहौल को भी प्रभावित कर रहा है. अब व्यक्तिगत जरूरतों और कार्यस्थल के बीच संवाद पहले की तुलना में अधिक खुला दिखाई दे रहा है.