करनाल | रबी सीजन की प्रमुख फसलों में से एक गेहूं बिजाई को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। बता दें कि गेहूं की सटीक बिजाई ही किसान की मेहनत के फल का भविष्य तय करती है। खाद-बीज से लेकर समय पर बिजाई जैसी महत्वपूर्ण बातों में यदि कोई छोटी सी भी गलती हो गई तो पूरी फसल व कमाई पर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन्नत किस्में, फसल सुरक्षा और आधुनिक कृषि तकनीक जिससे गेहूं की फसल का बंपर पैदावार हासिल किया जा सके।

इन बातों का रखें ध्यान
- गेहूं की बिजाई में अनावश्यक देरी करने से फसल को पकने के समय अधिक तापमान सहन करना पड़ता है जिससे उत्पादन प्रभावित होने का जोखिम बना रहता है।
- बीज और मिट्टी से फैलने वाले रोगों से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाहनुसार बीजोपचार करें। उपचार के लिए अनुशंसित दवा और निर्धारित मात्रा का ही इस्तेमाल करें।
- अधिक बीज डालने से ज्यादा उत्पादन नहीं मिलता है। उन्नत किस्में, बिजाई का उपयुक्त समय और बिजाई की विधि के अनुसार ही बीज की मात्रा तय करें।
- खेत में खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच कराना फायदेमंद साबित होता है। इससे जरूरत के हिसाब से पोषक तत्व दिए जा सकते हैं जिससे अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।
- धान की पराली जलाने से परहेज़ करें।
अगेती व समय पर बिजाई के कई विकल्प
हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में अगेती बुआई और अच्छी उर्वरता वाली परिस्थितियों के लिए DBW-370, DBW- 371, DBW-372, DBW-327, DBW-332 और DBW-303 जैसी किस्में विकल्प हैं। वहीं, समय पर बिजाई के लिए DBW-222, DBW-187 और सीमित सिंचाई की परिस्थितियों में DBW-296 पर भी विचार किया जा सकता है।
नई किस्म का नाम सुनकर मत खरीदें बीज
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि नई किस्म का नाम सुनकर ही बीज न खरीदें। अपने क्षेत्र और बुआई की परिस्थिति के लिए उसकी नवीनतम अनुशंसा की पुष्टि जरूर करें। अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म को देर से बोने या समय पर बिजाई वाली किस्म को अनुपयुक्त परिस्थितियों मे लगाने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते हैं।