नई दिल्ली | रबी सीजन में अच्छी गेहूं की पैदावार के लिए खेत की तैयारी और खाद-पानी के साथ ही सही बीज का चुनाव भी अहम होता है। बाजार में गेहूं की कई किस्में उपलब्ध हैं, जिनकी पैदावार, पौधों की लंबाई और पकने की अवधि अलग-अलग है। ऐसे में बुवाई से पहले इनके बारे में जानकारी होना किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है। बता दें कि गेहूं की अलग-अलग किस्मों के लिए बुवाई का समय भी अलग रखा गया है।

कुछ किस्मों की बुवाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से की जा सकती है, जबकि कुछ नवंबर से दिसंबर तक बोई जा सकती हैं। नीचे प्रमुख किस्मों की पैदावार, लंबाई और पकने की अवधि की जानकारी दी गई है।
ये किस्म देगी ज्यादा पैदावार
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, DBW 327 की पैदावार 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। वहीं, DBW 173 और DBW 187 की संभावित पैदावार 24 से 29 क्विंटल प्रति एकड़ तक है। HD 3386 की पैदावार 28 क्विंटल प्रति एकड़ दी गई है। केवल पैदावार के आंकड़े देखकर बीज का चुनाव नहीं करना चाहिए। अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और बुवाई के समय को ध्यान में रखना जरूरी है।
देखें चार्ट
| किस्म | पैदावार प्रति एकड़ | लंबाई | बुवाई का समय | पकने की अवधि |
|---|---|---|---|---|
| DBW 327 | 28–30 क्विंटल | 98–100 सेमी | 20 अक्टूबर–13 नवंबर | 150–155 दिन |
| WH 1270 | 24–28 क्विंटल | 98–100 सेमी | 25 अक्टूबर–10 नवंबर | 150–156 दिन |
| PBW 826 | 24–26 क्विंटल | 100 सेमी | 25 अक्टूबर–15 नवंबर | 150–156 दिन |
| DBW 303 | 24–28 क्विंटल | 101 सेमी | 25 अक्टूबर–15 नवंबर | 120–140 दिन |
| DBW 222 | 24–28 क्विंटल | 103 सेमी | 1–25 नवंबर | 120–125 दिन |
| DBW 173 | 24–29 क्विंटल | 90 सेमी | 5–25 नवंबर | 120–140 दिन |
| DBW 187 | 24–29 क्विंटल | 104–106 सेमी | 1–25 नवंबर | 145–155 दिन |
| HD 2967 | 22–24 क्विंटल | 98–101 सेमी | 25 अक्टूबर–10 नवंबर | 140–150 दिन |
| HD 3086 | 24–26 क्विंटल | 96–98 सेमी | 5–25 नवंबर | 126–134 दिन |
| HD 2851 | 24–26 क्विंटल | 85 सेमी | 10 नवंबर–20 दिसंबर | 145–150 दिन |
| HD 3386 | 28 क्विंटल | 95 सेमी | 1–25 नवंबर | 121–145 दिन |
| HD 3406 | 25–27 क्विंटल | 104 सेमी | 5–20 नवंबर | 148 दिन |
| PBW 872 | 25–27 क्विंटल | 104 सेमी | 5–20 नवंबर | 148 दिन |
अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से किस्म की स्थानीय उपयुक्तता और प्रमाणित बीज की जानकारी लेकर ही बुवाई करें। वास्तविक पैदावार मौसम और खेती के प्रबंधन के अनुसार कम-ज्यादा हो सकती है।