किसानों के लिए अच्छी खबर, विदेशों से सस्ता यूरिया खरीदने की तैयारी में भारत

नई दिल्ली | रबी की फसलों की बुआई शुरू होने से पहले किसानों को खाद की उपलब्धता की चिंता रहती है। खासकर गेहूं और दूसरी फसलों के लिए यूरिया की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद की आपूर्ति प्रभावित होने से खेती के काम में परेशानी आ सकती है। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से यूरिया की खरीद को लेकर राहत भरे संकेत मिले हैं। वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें अगस्त के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत कम हुई हैं।

Kisan Urea Cheap Rate

सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड ने रबी सीजन से पहले 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर जारी किया है। इसमें पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन और पूर्वी तट के लिए सात लाख टन यूरिया खरीदने की योजना है।

यूरिया की कीमत

नए टेंडर में पूर्वी तट के लिए सबसे कम बोली 352.10 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर प्रति टन रही। वहीं, अगस्त में कीमतें करीब 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं। इस तरह आयात की प्रस्तावित दरों में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आई है। 17 लाख टन की जरूरत के मुकाबले कंपनियों ने करीब 53.5 लाख टन यूरिया की पेशकश की है।

सरकार को सब्सिडी

देश में हर साल करीब 400 लाख टन यूरिया की जरूरत पड़ती है। इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन से मिलता है, जबकि बाकी आयात करना पड़ता है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 251.26 लाख टन उत्पादन और 89.30 लाख टन आयात के आंकड़े बताए गए हैं। किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया का बैग 242 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है। इसकी लागत और निर्धारित बिक्री मूल्य का अंतर सरकार सब्सिडी के जरिए वहन करती है।

चीन से बढ़ी आपूर्ति का भी असर

इस साल वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। अप्रैल में कीमतें 959 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंचने की बात सामने आई थी। इसी बीच चीन की निर्यात नीति में ढील से अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की उपलब्धता बढ़ी है।

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Sanjukta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.