करनाल | हरियाणा में धान की कटाई के बाद किसान अगली फसल की तैयारी में जुट जाते हैं। ऐसे में कई किसान ऐसी फसल लगाना चाहते हैं, जिससे कम समय में अच्छी पैदावार के साथ आमदनी भी हो सके। आलू की खेती उनके लिए एक ऑप्शन हो सकती है। हालांकि, बेहतर उत्पादन के लिए सही समय पर बुआई और अच्छी किस्म का चुनाव करना जरूरी है।

हरियाणा के मैदानी इलाकों में आलू की अगेती बुआई के लिए 10 से 25 अक्टूबर तक का समय उपयुक्त माना जाता है। वहीं, पछेती बुआई नवंबर के पहले पखवाड़े तक की जा सकती है। हालांकि, किसानों को अपने क्षेत्र के मौसम, मिट्टी और तापमान के अनुसार बुआई का समय तय करना चाहिए।
आलू उत्पादन का लक्ष्य
बागवानी विभाग के अनुसार, प्रदेश में इस बार 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती और 8 लाख 16 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आलू की खेती शुरू करने से पहले किसानों को खेत में नमी और पानी की निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, किसान कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज, कुफरी बहार और कुफरी चंद्रमुखी जैसी किस्मों पर विचार कर सकते हैं। हर किस्म की फसल अवधि, उत्पादन क्षमता और रोगों के प्रति संवेदनशीलता अलग हो सकती है। इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
पछेती झुलसा जैसे रोग फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में रोग की पहचान किए बिना कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सही किस्म, समय पर बुआई और बेहतर फसल प्रबंधन से किसानों को अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ सकती है- डॉ. मनोज भानुकर, डिप्टी डायरेक्टर, आलू प्रौद्योगिकी संस्थान, करनाल
इन बातों का रखें ध्यान
- आलू की अच्छी पैदावार के लिए खेत की मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए।
- खेत में पानी जमा होने से कंद सड़ने और बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।
- किसानों को स्वस्थ और प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करना चाहिए।
- इसके साथ मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित खाद और सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए।