चंडीगढ़ | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए पेपर लीक और नकल बड़ी परेशानी बन जाती है। मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को संगठित गिरोहों की धांधली के कारण नुकसान उठाना पड़ता है। अब हरियाणा सरकार ने ऐसे मामलों पर सख्ती करने की तैयारी कर ली है। बता दें कि हरियाणा में प्रतियोगी और विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित तरीके से गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार के नए कानून के प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।

इसके तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने की सजा हो सकती है। नए प्रावधानों के अनुसार, पेपर लीक करने, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और फर्जी एडमिट कार्ड या वेबसाइट तैयार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
10 साल की जेल
यदि किसी संगठित गिरोह या संस्थान की भूमिका सामने आती है तो उसके सदस्यों को 10 साल तक की कैद और अधिकतम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। अब परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसियां भी नियमों के दायरे में होंगी। यदि कोई एजेंसी परीक्षा में गड़बड़ी की दोषी पाई जाती है तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, परीक्षा कराने में हुआ पूरा खर्च भी वसूला जाएगा। ऐसी एजेंसियों को 8 साल तक ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा।
केस निपटाने का प्रावधान
उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। नए कानून के तहत ये अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनीय होंगे। पुलिस और जांच एजेंसियों को दो महीने में जांच पूरी करनी होगी। वहीं, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था से परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों और संस्थानों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।