अंबाला | आजादी की लड़ाई में देश के हजारों वीरों ने अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इनमें कई ऐसे बलिदानी भी थे, जिनकी शहादत को इतिहास में वह पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे हकदार थे। अब हरियाणा के अंबाला में बने शहीद स्मारक के जरिए लोग देश की आजादी के संघर्ष और वीरों की कुर्बानी को करीब से जान सकेंगे। बता दें कि अंबाला छावनी में निर्मित आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक को 15 नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर शुरुआती एक महीने तक प्रतिदिन 500 लोगों को स्मारक में नि:शुल्क प्रवेश दिया जाएगा। खास बात यह है कि मुफ्त एंट्री के लिए भी टिकट बुक कराना अनिवार्य होगा।
होगी टिकट बुकिंग
ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने बताया कि स्मारक में घूमने के लिए सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक टिकट बुक कराई जा सकेगी। इच्छुक लोग आधिकारिक वेबसाइट ambalawarmemorial.com पर जाकर ऑनलाइन टिकट ले सकते हैं। इसके अलावा स्मारक परिसर में भी टिकट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अनिल विज ने बताया कि 1857 की क्रांति की शुरुआत 10 मई को मेरठ से पहले अंबाला छावनी में हो गई थी। उनके अनुसार, यहां आजादी की पहली लड़ाई मेरठ से करीब 9 घंटे पहले शुरू हुई थी।
स्मारक का लोकार्पण
विज ने कहा कि इन बलिदानियों को इतिहास में उचित सम्मान दिलाने के उद्देश्य से शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया है। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह पहले ही इसका लोकार्पण कर चुके हैं। अब 15 नवंबर से आम लोग भी यहां पहुंचकर 1857 की क्रांति और देश के वीर शहीदों के इतिहास को जान सकेंगे। उस दौरान अंग्रेजों ने हजारों लोगों पर अत्याचार किए। कई क्रांतिकारियों को पेड़ों से बांधकर गोलियां मारी गईं, तो कई गांवों को आग के हवाले कर दिया गया।