चंडीगढ़ | हरियाणा में राज्यसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. दो सीटों पर 3 उम्मीदवार चुनावी रण में ताल ठोक चुके हैं. विधायकों की संख्या बल के हिसाब से देखें तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को 1- 1 सीट पर आसानी से जीत हासिल होगी. यदि क्रॉस वोटिंग हुई तो फिर समीकरण गड़बड़ा सकते हैं. इसी गड़बड़ी से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को हिमाचल प्रदेश में शिफ्ट कर दिया है. बीजेपी ने भी अपने सभी विधायकों को चंडीगढ़ में शिफ्ट किया हुआ है.
राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया
राज्यसभा चुनाव के लिए सिर्फ निर्दलीय विधायक ही गुप्त मतदान कर सकते हैं जबकि BJP, कांग्रेस और INLD के विधायकों को अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाने के बाद ही बैलेट बॉक्स में वोट की पर्ची डालने का अधिकार होगा.
साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली NDA सरकार के दौरान संसद द्वारा लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 (आरपी एक्ट) में संशोधन किया गया था. इसमें यह प्रविधान किया गया था कि राज्यसभा की सीटों के निर्वाचन हेतु होने वाली वोटिंग में ओपन बैलट से वोट दिए जाएंगे. यानि कि ऐसे चुनावों में मतदान गुप्त नहीं होता.
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और राजनीतिक मामलों के जानकार एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि राज्यसभा चुनाव के लिए होने वाली वोटिंग से पहले हर उस राजनीतिक दल के अध्यक्ष या महासचिव को बाकायदा फार्म 22A में पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं को अधिकृत एजेंट के रूप में नियुक्त करना होता है, जिसके सदस्य संबंधित विधानसभा के सदस्य हों. उनका कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी पार्टी के विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में मतदान के दौरान किसको वोट डाला है.
ऐसी स्थिति में रद्द हो जाएगा वोट
वोटिंग के दिन पार्टियों के अधिकृत एजेंट मतदान केंद्र के अंदर ही बैठते हैं. जब संबंधित पार्टी का विधायक मतदान के निर्वाचन अधिकारी से बैलेट पेपर प्राप्त करने के बाद उस पर पहली, दूसरी, तीसरी प्राथमिकता अंकित करता है तो उसे भरे हुए बैलेट पेपर को बैलट बाक्स में डालने से पूर्व अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है. यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उस विधायक का वोट अमान्य माना जाता है और उसे रद्द कर दिया जाएगा.
यदि विधायक ने पार्टी के अधिकृत एजेंट की जगह पर किसी अन्य को अपना वोट दिखाया तो उस परिस्थिति में भी वह वोट रद्द कर दिया जाता है. मतगणना के बाद बैलेट पेपरों को सील करने से पूर्व भी रिटर्निंग अधिकारी द्वारा पार्टी के अधिकृत एजेंट्स को उनके पार्टी विधायकों द्वारा डाले गए वोट दिखाए जाते हैं.
