करनाल | हरियाणा के खिलाड़ियों की बात हो और कबड्डी का नाम न आए, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है. प्रदेश के कई खिलाड़ी अपने शानदार खेल के दम पर देश का नाम रोशन कर चुके हैं. इसी बीच भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान सुनील मलिक ने भी एशियन गेम्स में कमाल कर दिखाया है. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने ईरान को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है. तो चलिए आज हम उनके शिशक्षा, मेहनत, सहयोग इन सबके बारे में विस्तार से बात करेंगे… उसके लिए आप आखिर तक हमारे साथ बने रहिए…
बता दें कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद सुनील मलिक करनाल पहुंचे. यहां खेल प्रेमियों और उनके समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. इस दौरान सुनील ने फाइनल मुकाबले से लेकर अपने कबड्डी के सफर तक कई बातें कीं.
भारत ने पलटा मैच
सुनील मलिक ने बताया कि फाइनल मुकाबला इतना आसान नहीं था. शुरुआत में ईरान की टीम भारत से आगे चल रही थी. ऐसे में भारतीय टीम के सामने मैच में वापसी करने की चुनौती थी. ब्रेक के बाद खिलाड़ियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और फिर मैच की तस्वीर बदलनी शुरू हो गई. पूरी टीम ने मिलकर आखिरी समय तक मुकाबला किया और आखिर में भारत गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहा.
सुनील के मुताबिक, भारतीय कबड्डी का एशियन गेम्स में शानदार रिकॉर्ड रहा है. एक एशियन गेम्स को छोड़कर भारत ने लगभग हर बार कबड्डी में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है. उन्होंने हरियाणा के खिलाड़ियों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी लगातार देश के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.
छोटी उम्र में खेली थी कबड्डी
आज भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे सुनील मलिक का यहां तक पहुंचने का सफर भी आसान नहीं रहा. उन्होंने महज 10-11 साल की उम्र में कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था. इसके बाद रास्ते में कई परेशानियां आईं, लेकिन उन्होंने खेल नहीं छोड़ा. लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने भारतीय टीम तक का सफर तय किया.
