पंचकूला | बचपन में जिन नरेंद्र शास्त्री को उनके भाई पीठ पर उठाकर स्कूल पहुंचाते थे, उन्होंने अब सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल की जिम्मेदारी संभाल ली है. पंचकूला के जटोली गांव निवासी नरेंद्र शास्त्री ने 28 सितंबर को चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रायपुर कलां में पदभार ग्रहण किया. 1 साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित हुए नरेंद्र शास्त्री 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं. इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और शिक्षा विभाग में शिक्षक से प्रिंसिपल तक का सफर तय किया.
नरेंद्र शास्त्री बताते हैं कि बचपन में पढ़ाई जारी रखने के लिए उनके परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया. उनके भाई उन्हें अपनी पीठ पर उठाकर स्कूल ले जाते थे, ताकि शारीरिक परेशानी उनकी शिक्षा में बाधा न बने.
भाइयों ने पीठ पर उठाकर पहुंचाया स्कूल
दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अंबाला के हॉस्टल में रहकर शास्त्री का डिप्लोमा हासिल किया. इसके बाद बीएड की पढ़ाई भी पूरी की. नरेंद्र के अनुसार, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत जरूरी है. वह अपनी उपलब्धि के पीछे परिवार के सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानते हैं. नरेंद्र शास्त्री ने वर्ष 1994 में चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में एडहॉक आधार पर काम करना शुरू किया था. वर्ष 2000 मेंNarendra Shastri Principal, Chandigarh Education Department, Raipur Kalan Government School, Haryana Success Story, Government School Principal उनकी नियुक्ति नियमित हुई. शिक्षा विभाग में नियमित सेवा के 26 वर्षों के दौरान उन्होंने टीजीटी से पीजीटी तक की जिम्मेदारी निभाई. अब पदोन्नति के बाद उन्हें प्रिंसिपल बनाया गया है.
8 प्रिंसिपल ने संभाला पदभार
उनकी नियुक्ति रायपुर कलां स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई है, जहां उन्होंने 28 सितंबर को कार्यभार संभाल लिया. चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में सोमवार को नरेंद्र शास्त्री सहित कुल आठ प्रिंसिपल ने अपने-अपने पदों पर ज्वाइन किया. नरेंद्र शास्त्री का यह सफर उनके परिवार के सहयोग, शिक्षा के प्रति लगन और लंबे सेवाकाल से जुड़ा है. शिक्षक के रूप में काम शुरू करने के बाद अब वह स्कूल के प्रशासनिक और शैक्षणिक संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे.
