पलवल | हरियाणा के पलवल जिले के अंजू सिंह तंवर और श्रवण सिंह तंवर ने एक अनोखा ग्रेविटी फोर्स इंजन बनाया है, जिसकी चर्चा हर ओर हो रही है. यह दोनों आपस में चाचा- भतीजे हैं और इन्होंने 18 साल की मेहनत और रिसर्च के बाद यह तकनीक विकसित की है. इस इंजन की सबसे खास बात यह है कि यह बिना डीजल, पेट्रोल या बिजली के काम करता है और सभी जरूरी कार्य आसानी से कर लेता है. इसमें ग्रेविटी को ऊर्जा में तब्दील किया गया है.
समय सीमा से परे कार्य क्षमता
इस ग्रेविटी फोर्स इंजन की कार्यक्षमता की कोई तय सीमा नहीं है. इसे जरूरत के अनुसार घटाया और बढ़ाया जा सकता है. यह बिना किसी पारंपरिक फ्यूल के हवा के विरुद्ध भी तेज गति से कार्य कर सकता है. अंजू सिंह बताते हैं कि गांवों में बिजली की आपूर्ति अक्सर बाधित रहती है, इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह इंजन बनाया गया है. इस इंजन से पैदा होने वाली एनर्जी अनलिमिटेड है. इसका इस्तेमाल इंडस्ट्री में भी किया जा सकता है.
इंसानी दिल से लिया आइडिया
इस तकनीक को विकसित करने वाले अंजू सिंह तंवर और श्रवण सिंह तंवर का कहना है कि उन्होंने इंसान के दिल की कार्यप्रणाली को आधार मानकर यह इंजन तैयार किया है. आज तक कोई भी तकनीक ऐसी नहीं बनी थी जो हवा के विरुद्ध बिना किसी बाहरी ऊर्जा के चल सके, लेकिन इस ग्रेविटी फोर्स इंजन ने यह असंभव कार्य भी संभव कर दिखाया है. उनका दावा है कि इस तकनीक के बाद बिजली के खंभों और तारों की जरूरत खत्म हो जाएगी.
बिना फ्यूल के चलता है इंजन
अन्य ऊर्जा स्रोतों की तरह इसमें ना तो किसी फ्यूल की जरूरत है और ना ही समय की कोई सीमा है. इसमें ऊर्जा के रूप में ग्रेविटी का इस्तेमाल किया गया है. शुरुआती दौर में जब इस विषय पर उन्होंने देश और प्रदेश के वैज्ञानिकों से बात की, तो उन्हें यह असंभव बताया गया. दोनों ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें सफलता मिली.
लोड बढ़ने पर भी नहीं बढ़ता एनर्जी खर्च
मौजूदा बाजार में जो मशीनें हैं, उनमें लोड बढ़ने पर एनर्जी की खपत भी बढ़ जाती है, लेकिन ग्रेविटी फोर्स इंजन में ऐसा नहीं होता. लोड कितना भी हो, एनर्जी खर्च समान रहता है. इस मशीन को स्टार्ट करने के लिए सामान्य बाइक बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे चार्ज करने के लिए किसी अलग चार्जिंग स्रोत की आवश्यकता नहीं होती. इस तकनीक की मदद से उन्होंने गन्ने का रस निकालने वाली मशीन और गाड़ियों को चलाने की मशीन भी बनाई है, जो केवल तीन एंपियर की मामूली एनर्जी पर काम करती है.
हवा के विरुद्ध कार्य करने वाली पहली मशीन
इस यंत्र की खासियत यह है कि यह हवा के विरुद्ध भी कार्य कर सकता है. अंजू सिंह बताते हैं कि शुरुआत में लोग उनके प्रोजेक्ट पर हंसते थे और बड़े- बड़े इंजीनियरों ने भी इसे असंभव बताया था. उन्हें शुरुआती दिनों में असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अंततः उन्होंने अपने सपने को साकार कर दिखाया है.
