राम रहीम हिंसा केस में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने 4 आरोपियों को दी राहत; सरकार की अपील खारिज

चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा से जुड़े एक अहम मामले में चार आरोपियों को बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने कैथल के कलायत स्थित उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVN) कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा चार आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है. इसके साथ ही हरियाणा सरकार की अपील भी खारिज कर दी गई. जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान, घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी और लगाए गए आरोपों के जरूरी कानूनी तत्वों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा.

ram rahim

अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने मामूली तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गंभीर विरोधाभासों, जांच में खामियों, संदिग्ध बरामदगी, विश्वसनीय पहचान के अभाव, फोरेंसिक पुष्टि नहीं होने और कानूनी आवश्यकताओं के पूरे न होने के आधार पर आरोपियों को बरी किया था.

राम रहीम हिंसा केस

हरियाणा सरकार ने 23 सितंबर 2019 को कैथल की सत्र अदालत के फैसले को चुनौती दी थी. ट्रायल कोर्ट ने धर्मपाल, जसबीर, शिव कुमार उर्फ बब्बर और बलबीर को भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (राजद्रोह), 188, 427, 436, 450, 120-बी, धारा 34 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत बरी कर दिया था. अभियोजन के अनुसार, 25 अगस्त 2017 को 14-15 लोगों की भीड़ लाठी, डंडे, गंडासी और पेट्रोल की बोतलों के साथ राम रहीम के समर्थन में नारे लगाते हुए यूएचबीवीएन कार्यालय पहुंची थी.

कर्मचारियों के वहां से निकलने के बाद कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई. पुलिस ने जांच के दौरान चार मोटरसाइकिल जब्त करने और आरोपियों के बयान के आधार पर पेट्रोल की बोतलें व हथियार बरामद करने का दावा किया था.

4 आरोपियों को राहत

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि एफआईआर में किसी भी आरोपी का नाम दर्ज नहीं था और कोई भी गवाह उनकी घटनास्थल पर मौजूदगी साबित नहीं कर सका. अदालत ने कहा कि बलबीर सिंह के खिलाफ मामला केवल सह- आरोपी के खुलासा बयान पर आधारित था, जबकि उससे कोई आपत्तिजनक बरामदगी नहीं हुई. वहीं शिव कुमार का नाम न तो मूल शिकायत में था और न ही जांच अधिकारी के शुरुआती बयान में. अदालत ने यह भी कहा कि प्रमुख पहचान गवाह के अलग- अलग बयान होने के कारण उसकी गवाही भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती. गवाह आरोपी को पहले से नहीं जानते थे, इसलिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) नहीं कराना भी जांच की बड़ी कमी रही. इससे अदालत में की गई पहचान का साक्ष्य कमजोर हो गया.

यह भी पढ़े -  हरियाणा में 11 सौ से अधिक प्राइवेट स्कूलों पर एक्शन, 63 के MIS पोर्टल बंद; नए एडमिशन पर तत्काल रोक

सरकार की अपील खारिज

खंडपीठ ने फोरेंसिक रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें जले हुए सामान पर पेट्रोल, डीजल, मिट्टी के तेल या उनके अवशेष नहीं मिले. अदालत ने कहा कि इससे अभियोजन का पूरा मामला और कमजोर हो गया. राजद्रोह के आरोप पर भी हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंसक प्रदर्शन को दंगा माना जा सकता है, लेकिन केवल सरकार के खिलाफ नारेबाजी या विरोध के आधार पर इसे राजद्रोह नहीं कहा जा सकता. अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के खिलाफ नारे लगाना अपने आप में राजद्रोह नहीं बनता. अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता केवल संदेह से आगे साबित नहीं कर सका, इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला सही माना गया.

Avatar of Puja Kumari
Puja Kumari
View all posts

मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.