सोनीपत | हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव हसनयारपुर तिहाड़ा कलां में आज बुधवार को आस्था, श्रद्धा और गो सेवा का अनूठा धार्मिक आयोजन हुआ. 18 वर्षों तक दहिया परिवार के साथ रही गो माता ‘नंदिनी’ की तेरहवीं पर सामूहिक हवन, गो आरती, पुष्पांजलि और महाभोज का आयोजन किया गया. गो माता ‘नंदिनी’ का बीमारी के कारण निधन होने के बाद 7 जुलाई को परिवार ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प वर्षा कर अंतिम विदाई दी थी. धार्मिक रीति- रिवाजों से अंतिम संस्कार करने के बाद उन्हें पूरे सम्मान के साथ समाधि दी गई. अब उनकी स्मृति में तेरहवीं पर विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जा रही है.

गो माता ‘नंदिनी’ को अपने जीवनकाल में रसगुल्ले बेहद पसंद थे. इसी श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए परिवार ने करीब 650 किलोग्राम रसगुल्लों का विशेष भोग तैयार कराया है. इसके अलावा पेठे और आलू की सब्जी, पूरी सहित अन्य प्रसाद भी श्रद्धालुओं के लिए बनाया गया है.
हवन यज्ञ से शुरुआत
मंजीत तिहाड़ा के अनुसार धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे सामूहिक हवन यज्ञ से हुई. इसके लिए विशेष आकार का हवन कुंड तैयार किया गया. 11 विद्वान पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के साथ लगभग 45 मिनट तक आहुति दिलाएं. श्रद्धालु भी हवन में शामिल होकर गो माता ‘नंदिनी’ को श्रद्धासुमन अर्पित किएं. हवन के बाद सुबह 10 बजे गो आरती हुआ. इसके बाद, सुबह 11 बजे महाभोज का आयोजन किया गया. सबसे पहले 21 ब्राह्मणों को प्रसाद वितरित किया और फिर सभी श्रद्धालुओं को महाभोज कराया गया.
11 गांवों के लोगों को दिया गया निमंत्रण
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में तिहाड़ा कलां, तिहाड़ा खुर्द, ताजपुर, भटगांव, लुहारी टिब्बा, रतनगढ़, सलीमसर माजरा, बड़वासनी, महलाना, खेड़ी दहिया और भदाना सहित 11 गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया है. परिवार ने कई दिन पहले इन गांवों में मुनादी भी करवाई थी ताकि अधिक से अधिक लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकें. दहिया परिवार के अनुसार कामधेनु स्वरूपा गो माता ‘नंदिनी’ करीब 18 वर्षों तक जय भगवान (गोरख) के पुत्र मेहरबान दहिया के परिवार के साथ रहीं. परिवार उन्हें गाय नहीं बल्कि घर के सदस्य और बेटी की तरह मानता था. उनके निधन के बाद उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यह विशेष आयोजन रखा गया है.
3 महीने की बछड़ी बनकर आई थी घर
मंजीत तिहाड़ा ने बताया कि करीब 18 वर्ष पहले उनके भाई मेहरबान गांव महलाना से नंदिनी की मां को घर लेकर आए थे. उस समय नंदिनी केवल तीन महीने की बछड़ी थी. करीब दो साल की उम्र में प्रसव के दौरान उसकी मां की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार ने उसे बेटी की तरह पाल- पोसकर बड़ा किया. परिवार के बच्चों के साथ उसका विशेष लगाव था और उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया.
12 संतानों को दिया जन्म
अपने जीवनकाल में नंदिनी ने 12 संतानों को जन्म दिया. इनमें से छह गाय आज भी दहिया परिवार के पास हैं, जबकि बाकी बछड़े और बछड़ियां परिवार ने अपने परिचितों को दे दिए. परिवार आज भी पूरी श्रद्धा के साथ गौवंश की सेवा कर रहा है. करीब साढ़े तीन महीने तक नंदिनी का इलाज चला. परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि उसने संभवतः लोहे का कोई टुकड़ा निगल लिया था, जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई. एक सप्ताह पहले उसकी आखिरी बछड़ी की भी मौत हो गई थी और उसके ठीक एक सप्ताह बाद नंदिनी ने भी दम तोड़ दिया.
सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई
नंदिनी के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर पर गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्प वर्षा की गई. वैदिक रीति- रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया और समाधि में 31 किलोग्राम नमक डालकर मिट्टी दी गई. परिवार का कहना है कि गो माता को सम्मानपूर्वक विदाई देना उनका धार्मिक और नैतिक दायित्व था. दहिया परिवार ने क्षेत्र के सभी ग्रामीणों, गो भक्तों और श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने की अपील की है.