चंडीगढ़ | हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस को लेकर नए सिरे से दिशा- निर्देश जारी किए हैं. बदले नियमों में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया गया है. इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुमिता मिश्रा ने बताया कि नए नियम 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगे.

उन्होंने बताया कि प्रदेश में डेंगू मरीजों से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए कोई भी प्राइवेट अस्पताल 11 हजार रुपए से ज्यादा शुल्क नहीं वसूल करेगा. इसी तरह एलिसा आधारित NS-1 और LGM टेस्ट के लिए अधिकतम 600 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है.
सिविल सर्जन को देनी होगी जानकारी
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों एवं लैबोरेटरी को वेक्टर-बोर्न बीमारियों के प्रत्येक कन्फर्म केस की रिपोर्ट पता चलने के 24 घंटे के अंदर रोगी की पूरी जानकारी संबंधित सिविल सर्जन को देना अनिवार्य होगा और इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफार्मेशन प्लेटफार्म पोर्टल पर भी इसे अपडेट किया जाना चाहिए. मलेरिया का केस माइक्रोस्कोपी या एंटीजन और बेस्ड रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट से कंफर्म होने के बाद ही पॉजिटिव बताया जा सकता है. गू के केस की पुष्टि सिर्फ एलिसा आधारित NS- 1 LGM या आरटी एवं पीसीआर टेस्ट से ही की जा सकती है.
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि NSI एंटीजन टेस्ट केवल उन्हीं मरीजों का किया जाएं, जिन्हें 5 दिन से कम बुखार रहा हो. LGM एंटीबॉडी टेस्ट उन मरीजों का किया जाएं जिन्हें 5 दिन से ज्यादा बुखार रहा हो. किसी भी मरीज को कंफर्म टेस्ट किए बिना डेंगू पॉजिटिव घोषित न किया जाए. जिन मामलों में प्राइवेट लैब में एलिसा आधारित टेस्ट की सुविधा नहीं है, उन्हें मरीजों को कंफर्मेशन के लिए निर्धारित सरकारी लैब में भेजना होगा या उनके खून के सैंपल भेजने होंगे.
उल्लघंन करने पर लगेगा जुर्माना
उन्होंने बताया कि पहली बार नियमों का उल्लघंन करने पर 1 हजार रुपए, इसके बाद 5 हजार रुपए और तीसरी बार 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. किसी भी जुर्माने के खिलाफ 30 दिन के भीतर सिविल सर्जन की अध्यक्षता वाली अपीलेट कमेटी के सामने अपील की जा सकती है.