चंडीगढ़ | हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. बता दें कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोमवार को आयोजित हुई एक बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा और प्रधान सचिव अरुण गुप्ता के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की है.
बैठक के दौरान उन्होंने सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, चिकित्सा उपकरणों की स्थिति, OPD प्रबंधन, डॉक्टर्स व स्टाफ की तैनाती, दवा एवं उपकरणों की खरीद प्रक्रिया तथा मरीजों को दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
हरियाणा में बाहर की दवा नहीं लिखेंगे डॉक्टर्स
सीएम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं का रिकॉर्ड रियल टाइम सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. किस अस्पताल में कौनसी दवाइयां उपलब्ध है, इसके बारे में डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी ताकि बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं लिखने की गुंजाइश न बचे.
यदि फिर भी कोई डॉक्टर बाहर से मिलने वाली दवा मरीज की ओपीडी स्लिप पर लिखता है तो उसके साथ अस्पताल में दवा उपलब्ध न होने की जानकारी लिखनी होगी. अनावश्यक रूप से बाहर की दवाई लिखने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. दवाइयों की उपलब्धता और सुविधाओं के लिए सीएमओ की जवाबदेही तय की गई है.
मरीजों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण इलाज
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अस्पताल में दवाइयों की कमी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं की जाएगी. दवाइयों की खरीद को लेकर एक साल के लिए पैनल की व्यवस्था की जाए. सीएमओ चार दिन पहले ही पैनल में शामिल एजेंसियों को दवा की उपलब्धता बारे बता दें, ताकि दवाइयों की कमी न रहे.
अस्पतालों में डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को समय पर उपचार मिलना चाहिए. अस्पतालों में CT स्कैन, MRI सहित अन्य उन्नत चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. उन्होंने अस्पतालों में साफ- सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए.
