पानीपत | खाटूश्याम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. बता दें कि प्रदेश सरकार ने पानीपत के समालखा के चुलकाना धाम स्थित श्रीश्याम बाबा मंदिर के लिए अलग श्राइन बोर्ड बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कल सीएम नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में श्री बाबा खाटूश्याम श्राइन बोर्ड के गठन के लिए अध्यादेश लाने को मंजूरी प्रदान कर दी है.

प्रदेश सरकार के इस फैसले को धार्मिक पर्यटन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर प्रबंधन को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. दरअसल, 23 जनवरी 2025 को हरियाणा कैबिनेट ने चुलकाना धाम के लिए श्राइन बोर्ड गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन उसी दिन श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति रजिस्टर्ड, चुलकाना धाम द्वारा दायर सिविल रिट याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अंतिम निर्णय लेने पर रोक लगा दी थी.
श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधाएं
अब 14 मई को हाईकोर्ट ने मामले का निपटान करते हुए सरकार को जल्द श्राइन बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही अदालत में हरियाणा के एडवोकेट जनरल की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि प्रस्तावित बोर्ड में श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति का एक प्रतिनिधि भी शामिल होगा.
राज्य सरकार के अनुसार प्रस्तावित श्राइन बोर्ड 4.68 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा, जो पहले से श्री श्याम बाबा मंदिर के कब्जे में है. बोर्ड का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, भीड़ प्रबंधन को व्यवस्थित करना और मंदिर की संपत्तियों का पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना होगा. इससे श्रद्धालुओं को बेहतर पार्किंग स्थल, आवास, स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होगी. सरकार इसे धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम करेगी. सरकार का मानना है कि श्राइन बोर्ड बनने के बाद चुलकाना धाम में व्यवस्थाएं अधिक पेशेवर और संगठित होंगी, जिससे श्रद्धालुओं का अनुभव भी बेहतर होगा.
महाभारत काल से जुड़ा आस्था का केंद्र
पानीपत जिले के समालखा से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित चुलकाना धाम को भगवान खाटूश्याम की प्राचीन तपोस्थली माना जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान खाटूश्याम जी महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का ही स्वरूप हैं जिन्हंत कलियुग का देवता माना जाता है. इस धार्मिक स्थल पर सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं. फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी पर यहां विशाल मेले लगते हैं जबकि हर एकादशी पर जागरण और धार्मिक आयोजन होते हैं.