गुरुग्राम | हरियाणा के शहरों में रहने वालों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. बता दें कि देर रात नौकरी से घर आना हो या फिर एयरपोर्ट के लिए सफर करना या फिर बारिश में ऑफिस के लिए निकलना हो, शहरों की जिंदगी Ola- Uber जैसी कैब सेवाओं पर ही निर्भर करती है.

एकाएक उस वक्त हैरानी बढ़ जाती है जब 200 रुपए की यात्रा का किराया अचानक 700 रुपए दिखने लगता है. मोबाइल फोन की स्क्रीन पर लिखा आता है- ‘हाई डिमांड प्राइसिंग’, यानि कैब सर्विस वाले मौके का फायदा उठाते हुए किराए में बढ़ोतरी कर देते हैं.
नई पॉलिसी अधिसूचित
प्रदेश सरकार ने अब इसी ‘सर्ज प्राइस’ मॉडल पर बड़ा वार किया है. ‘हरियाणा मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026’ के जरिये राज्य सरकार ने ऐप आधारित कैब और डिलीवरी कंपनियों के लिए ऐसे नियम लागू किए हैं, जिनसे यात्रियों, ड्राइवरों और कंपनियों के लिए खेल बदल जाएगा.
सूबे की नायब सैनी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना किसी ठोस वजह के किराए में बढ़ोतरी महंगी पड़ सकती है. यदि कैब सर्विस कंपनियां गलत तरीके से ‘डायनामिक प्राइसिंग’ करती पाई गईं तो उनका लाइसेंस तक रद्द हो सकता है.
जितनी यात्रा उतना ही किराया
नयी पॉलिसी में सबसे बड़ी राहत ‘डेड माइलेज’ खत्म करने से मिली है. कई मर्तबा देखने को मिलता है कि कैब ड्राइवर दूर से खाली गाड़ी लेकर आता है, जिसका सीधा असर किराए पर पड़ता है. अब नियम साफ है कि यात्री उसी दूरी का किराया देगा, जितनी दूरी वह खुद यात्रा करेगा. गाड़ी आपको लेने कितनी दूर से आई, उसका पैसा आपकी जेब से नहीं जाएगा.
हरियाणा सरकार की नई पॉलिसी ड्राइवरों के लिए भी राहत लेकर आई है. सरकार ने तय किया है कि हर ट्रिप के किराये का कम से कम 80% हिस्सा ड्राइवर को मिलेगा. वहीं, महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब हर एग्रीगेटर वाहन में जीपीएस, पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र अनिवार्य किया गया है. सबसे बड़ा और जरूरी बदलाव यह है कि यदि ड्राइवर ऐप द्वारा बताए गए रास्ते से अलग जाता है, तो कंपनी के 24×7 कंट्रोल रूम में तुरंत अलर्ट जाएगा.
लाइसेंस हो जाएगा रद्द
नयी पॉलिसी में परिवहन आयुक्त को बड़ी शक्तियां दी गई हैं. यदि कोई कंपनी सुरक्षा नियमों का उल्लघंन करती है, गलत किराया वसूलती है, ड्राइवरों के हितों का उल्लंघन करती है या वित्तीय गड़बड़ी में पकड़ी जाती है तो उसका लाइसेंस तीन महीने तक निलंबित किया जा सकेगा. सैनी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब ऐप आधारित कैब सेवाएं सिर्फ टेक कंपनियों के भरोसे नहीं, बल्कि तय नियमों और जवाबदेही के दायरे में चलेंगी.