नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में नालों और सड़कों के निर्माण कार्य के दौरान अब बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित नहीं होगी. बता दें कि अक्सर अलग- अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण निर्माण के समय पाइपलाइन और अन्य नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो जाते थे जिससे आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती थीं. इसी समस्या के समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं को स्थानांतरित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है.
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नए दिशा- निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी सड़क या नाले की परियोजना के प्लानिंग चरण से ही इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), बीएसईएस और दिल्ली जल बोर्ड जैसी संबंधित एजेंसियों को बैठकों में शामिल करना अनिवार्य होगा. इससे यह पहले ही पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित क्षेत्र में कौन-कौन सी पाइपलाइन या लाइनें मौजूद हैं.
इन समस्याओं से मिलेगा फायदा
दिल्ली में लगातार नई सड़क परियोजनाओं और बड़े पैमाने पर नाला निर्माण कार्य चल रहे हैं ताकि जलभराव जैसी समस्याओं को कम किया जा सके. इसके वाबजूद, कई बार बिजली, पानी और गैस की लाइनों के कारण काम बाधित हो जाता है. कहीं दिल्ली जल बोर्ड की पाइपलाइन रास्ते में आ जाती है तो कहीं बिजली या गैस की लाइन निर्माण क्षेत्र से गुजरती है. ऐसे मामलों में जेसीबी से खुदाई के दौरान लाइनों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है. इसी को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने यह फैसला लिया है कि अब किसी भी नई सड़क या नाले की परियोजना के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक अनिवार्य होगी.
पहले किया जाएगा स्थानांतरित
यदि कोई लाइन पाई जाती है तो उसे पहले स्थानांतरित किया जाएगा, उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी उपयोगिता सेवा एजेंसियों के साथ मिलकर संयुक्त सर्वे करें और परियोजना के बीच आने वाली लाइनों के स्थानांतरण की योजना पहले से तैयार करें. इससे समय की बचत होगी और निर्माण कार्य के दौरान जनता को होने वाली असुविधा भी कम होगी.