फरीदाबाद में जलभराव पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, CEC तक पहुंचेगा मामला

फरीदाबाद | अरावली पहाड़ियों से निकलने वाले प्राकृतिक वर्षा जल निकासी नालों पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण का खामियाजा अनंगपुर गांव के हजारों लोगों को हर मानसून भुगतना पड़ रहा है. दो दिन की लगातार बारिश के बाद गांव में एक बार फिर बाढ़ जैसे हालात बन गए. गलियों में दो से ढाई फुट तक पानी भर गया, जबकि नालों के आसपास बने कई मकानों में भी जलभराव हो गया. इससे करीब 25 हजार से अधिक ग्रामीण प्रभावित हुए. ग्रामीणों का आरोप है कि प्राकृतिक नालों पर वर्षों से कब्जे किए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी अपने पुराने रास्ते से आगे नहीं बढ़ पाता और गांव की ओर फैल जाता है.

Aravali Hills

उन्होंने वन विभाग समेत कई सरकारी विभागों से शिकायतें कीं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया. अब ग्रामीण इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के समक्ष उठाने की तैयारी कर रहे हैं.

फरीदाबाद में जलभराव

गांव के भीतर और बाहरी हिस्से से गुजरने वाले करीब 10 प्राकृतिक नालों में अरावली के झरनों का वर्षा जल बहता था. पिछले एक दशक में इन नालों पर जगह-जगह अवैध निर्माण कर दिए गए हैं. कहीं फार्म हाउस, कहीं टीन शेड, तो कहीं चारदीवारी बनाकर नालों का स्वरूप बदल दिया गया है. पहले यही नाले बारिश का पानी आसानी से बड़खल झील तक पहुंचाते थे, लेकिन अब पानी गांव में भरने लगा है.

जलभराव के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के घरों में पानी घुस जाता है, जिससे घरेलू सामान खराब हो जाता है. लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से निकलना मुश्किल हो जाता है.

जमीन पर कब्जे का दावा

जानकारों के अनुसार पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (PLPA) के तहत अधिसूचित करीब 200 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हैं. यहां फार्म हाउस, टीन शेड और अन्य निर्माण किए गए हैं. इस जमीन की बाजार कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपये आंकी जा रही है.

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यही प्राकृतिक नाले अरावली और बणी घाटी क्षेत्र के लगभग 20 हजार बीघा इलाके का वर्षा जल बड़खल झील तक पहुंचाते थे. इसी प्राकृतिक जल प्रवाह के कारण ऐतिहासिक अनंगपुर बांध और सूरजकुंड झील का निर्माण संभव हुआ था. अब जल प्रवाह बाधित होने से ग्रामीणों के साथ-साथ अरावली के जंगल, वन्यजीव और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर पड़ रहा है.

ग्रामीणों ने उठाई कार्रवाई की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता राहुल भडाना उर्फ यूडी गुर्जर का कहना है कि वे पिछले एक दशक से नालों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रहे हैं. इसके लिए उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है, जिसमें करीब एक हजार ग्रामीण जुड़े हैं. उनका कहना है कि अधिकांश ग्रामीण अतिक्रमण हटाने के पक्ष में हैं, लेकिन कुछ लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही. उन्होंने वन विभाग, सिंचाई विभाग, नगर निगम, जिला प्रशासन, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक शिकायतें भेजी हैं. वार्ड- 21 के पार्षद वीरेंद्र भडाना ने भी माना कि प्राकृतिक नालों पर कब्जों के कारण ही हर मानसून में बाढ़ जैसे हालात बनते हैं. उन्होंने लोगों से स्वयं अतिक्रमण हटाकर पानी के प्राकृतिक बहाव को बहाल करने की अपील की.

अनंगपुर क्षेत्र में कई स्थानों पर नालों पर अतिक्रमण है. विभाग समय- समय पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करता है, लेकिन लोग दोबारा कब्जा कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्रामीणों को भी आगे आना होगा- झलकार उयाके, अधिकारी, वन मंडल

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Puja Kumari
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.