हिसार | चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) की विकसित की गई बाजरे की दो लोकप्रिय हाइब्रिड किस्मों एचएचबी- 299 और एचएचबी- 67 संशोधित- 2 का गुणवत्तायुक्त बीज अब देशभर के किसानों तक आसानी से पहुंचेगा. विश्वविद्यालय ने इन दोनों किस्मों के बीज उत्पादन और मार्केटिंग के लिए आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित प्रसिद्ध चक्रा सीड्स कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज की मौजूदगी में अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग और चक्रा सीड्स के प्रोपराइटर गणेश कुमार रेड्डी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए.

निजी कंपनियों के तकनीकी सहयोग से उन्नत बाजरा किस्मों का तेजी से विस्तार होगा और किसानों को समय पर प्रमाणित बीज उपलब्ध हो सकेगा. कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कहा कि इससे किसानों को बीज समय पर पहुंचेगा जिससे वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें.
एचएचबी- 299 की खासियत
एचएचबी- 299 आयरन से भरपूर और जोगिया (डाउनी फफूंदी) रोग के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी किस्म है. बेहतर प्रबंधन मिलने पर यह प्रति एकड़ 49 मन तक पैदावार देने की क्षमता रखती है. इस किस्म में करीब 73 PPM तक आयरन पाया जाता है, जो अन्य किस्मों की तुलना में अधिक है. इसके सिट्टे शंक्वाकार और मध्यम लंबे होते हैं तथा फसल 80 से 82 दिनों में पककर तैयार हो जाती है.
एचएचबी- 67 संशोधित- 2 की विशेषताएं
एचएचबी- 67 संशोधित- 2 कम पानी और सूखे वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म मानी जाती है. इसे 2021 में हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के शुष्क इलाकों के लिए अनुमोदित किया गया था. यह अगेती, मध्यम और पछेती तीनों प्रकार की बुवाई के लिए उपयुक्त है. इस किस्म से औसतन 20 मन दाना और 52 मन सूखा चारा प्रति एकड़ प्राप्त होता है. इसके नर जनक को मार्कर सहायक चयन तकनीक से और अधिक जोगिया रोगरोधी बनाया गया है.
समझौते के दौरान ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव, बाजरा अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. वीरेंद्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल और डॉ. देवव्रत यादव सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे.