चंडीगढ़ | हरियाणा में इन दिनों खरीफ फसलों की रोपाई और बुवाई का काम जोरों पर है. हालांकि, इस साल अब तक सामान्य से कम बारिश होने की वजह से नहरों में पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा है. बीते दो दिनों में हुई बारिश से हालात में कुछ राहत जरूर मिली है. इसी बीच भाखड़ा डैम के जलस्तर में पिछले 24 घंटों के दौरान 1.46 फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि हथिनीकुंड बैराज पर यमुना का प्रवाह मंगलवार के मुकाबले घट गया है. भाखड़ा डैम में साल भर पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए जलस्तर करीब 1680 फीट के आसपास होना जरूरी माना जाता है.

बुधवार को डैम का जलस्तर 1597.20 फीट रिकॉर्ड किया गया, जबकि मंगलवार को यह 1595.74 फीट पर था. 24 घंटों में करीब 1.46 फीट का इजाफा हुआ. फिलहाल, हरियाणा को सिंचाई के लिए करीब 8,208 क्यूसेक पानी मिल रहा है.
जलस्तर में उतार- चढ़ाव
हथिनीकुंड बैराज पर मंगलवार सुबह से लेकर बुधवार तक यमुना के जलस्तर में लगातार उतार- चढ़ाव देखने को मिला. मंगलवार सुबह छह बजे बैराज पर 18,969 क्यूसेक पानी दर्ज हुआ था, जो शाम तक बढ़कर करीब 30 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश की वजह से यह बढ़ोतरी हुई. बुधवार दोपहर 3 बजे तक यह प्रवाह घटकर करीब 23 हजार क्यूसेक ही रह गया, जबकि बरसात के मौसम में यहां सामान्य तौर पर 40 से 50 हजार क्यूसेक पानी का बहाव रहता है.
पानी की कमी नहीं
हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के इंजीनियर- इन- चीफ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश की वजह से यमुना के जलस्तर में यह उतार- चढ़ाव देखा जा रहा है. अगर अगले 2- 3 दिनों तक लगातार बारिश होती रही तो जलस्तर में और सुधार आएगा. सिंचाई के लिए पानी की कोई कमी नहीं है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर के मुताबिक, खरीफ फसलों की रोपाई और बुवाई का ज्यादातर काम 31 जुलाई तक पूरा हो जाएगा.
कुछ किसान इसे 10 अगस्त तक भी जारी रख सकते हैं. उन्होंने बताया कि धान की फसल के लिए 20 सितंबर तक नियमित सिंचाई की जरूरत बनी रहेगी. ऐसे में नहरों के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक होगा.