हांसी | हरियाणा के हांसी में स्थित समाधा मंदिर आस्था के साथ अपनी अनोखी मान्यताओं और पुराने इतिहास के लिए भी जाना जाता है. मंदिर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. खास बात यह है कि मंदिर परिसर में मौजूद एक बरगद का पेड़ लोगों के बीच लंबे समय से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इसकी बनावट ऐसी दिखाई देती है कि पेड़ का मुख्य तना जमीन से ऊपर हवा में टिका नजर आता है. समाधा मंदिर हांसी शहर के दक्षिण- पश्चिम हिस्से में स्थित है.
यह गौसाई गेट से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है. मंदिर का नाम बाबा जगन्नाथ पुरी जी की समाधी के नाम पर पड़ा है. हांसी को हरियाणा का 23वां जिला बनाए जाने के बाद क्षेत्र के विकास पर सरकार का विशेष ध्यान है. इसी कड़ी में समाधा मंदिर के कायाकल्प की योजना भी तैयार की गई है.
बनेगा स्मार्ट रोड
प्राचीन समाधा मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग को बेहतर बनाने की दिशा में नगर परिषद ने सिसाय पुल तक सड़क को स्मार्ट रोड के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है. रास्ते पर रंगीन टाइलें लगाने के साथ लाइटिंग और हरियाली की व्यवस्था की जाएगी. श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच लगाए जाएंगे. इसके अलावा रास्ते में करीब सात सेल्फी प्वाइंट भी विकसित किए जाएंगे.
हवा में तैरता बरगद
मंदिर परिसर में मौजूद बरगद का पेड़ सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है. इसकी मुख्य जड़ जमीन से अलग दिखाई देती है और तने तथा मुख्य जड़ के बीच करीब एक फुट का अंतर नजर आता है. यही वजह है कि पहली नजर में यह पेड़ हवा में लटका हुआ प्रतीत होता है. दरअसल, इसकी मोटी शाखाएं पास के दूसरे पेड़ पर टिकी हुई हैं, जिससे इसे सहारा मिलता है. इसी प्राकृतिक संरचना के कारण लोग इसे चमत्कार से जोड़कर देखते हैं और दूर- दूर से इसे देखने पहुंचते हैं.
जगन्नाथ पुरी से जुड़ा इतिहास
समाधा मंदिर का संबंध मध्यकालीन सिद्ध संत बाबा जगन्नाथ पुरी से बताया जाता है. मान्यता के अनुसार उन्होंने ही इस मंदिर की नींव रखी थी. किंवदंती के मुताबिक बाबा जगन्नाथ पुरी का जन्म 1570 ई. में भादो माह की कृष्णपक्ष की पंचमी को भिवानी जिले के तोशाम कस्बे में राजपूत परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम सूरजाराम तंवर बताया जाता है. बाबा जगन्नाथ पुरी ने समाज में धर्म के नाम पर फैले भेदभाव और पाखंड का विरोध किया. उन्होंने लोगों को आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया. पाखंडी चमत्कारों का विरोध करते हुए उन्होंने भयभीत लोगों और जीव- जंतुओं को भी भयमुक्त करने का प्रयास किया.
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