अंग्रेजों के जमाने से हो रही है अंबाला के स्थान इस पर रामलीला, मशाल की रोशनी से हुई थी शुरुआत

अंबाला । अंबाला के नारायणगढ़ में अंग्रेजों के जमाने में कभी रामलीला का मंचन मशाल की रोशनी में होता था. तब आस-पास के गांवों से लोग बैलगाड़ी, ट्रैक्टर ट्रॉली में रामलीला देखने के लिए आते थे. समय के साथ बदलाव के कारण इस मंच का अंदाज भी बदल गया. बता दे कि श्री सनातन धर्म महावीर दल द्वारा रामलीला का आयोजन किया जाता है जिसकी स्थापना पन्नू कौशिक ने दशको पहले की थी.

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RAMLILA IMAGE

अंग्रेजों के जमाने से हो रही है यहां रामलीला

आज यही संस्था अपनी संस्कृति को जिंदा रखते हुए लोगों तक रामकथा पहुंचा रही है. इसके कलाकार भी आयोजन को लेकर पहले से ही तैयारियों में लग जाते हैं. बता दें कि लोगों की जबान पर आज भी रंजीत कपूर का नाम है जिन्होंने 25 साल तक रावण का किरदार निभाया था. उनकी उम्र 92 साल हो चुकी है लेकिन लोगों को वह आज भी याद है. रात को शुरू हुई रामलीला सुबह 4:00 बजे तक चलती थी और लोग भी मंचन देखने के लिए बैठे रहते थे. क्रेज आज भी है लेकिन आज लोग 12:00 बजे तक मंचन देखने के लिए नहीं रुकते. उन्होंने साल 1972 से शत्रुघ्न का किरदार निभाने से शुरुआत की थी. हर कलाकार को अपने डायलॉग याद रखने पड़ते हैं. उन्होंने मेघनाथ, सुलोचना, दशरथ, भीलनी आदि के किरदार निभाए है. अब वह बतौर निर्देशक काम कर रहे हैं, आज भले ही मंचन का तरीका बदल गया हो लेकिन डायलॉग पहले की तरह ही याद करने पड़ते हैं.

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