स्मार्ट मीटर लगाने की पहल के लिए चुना गया हरियाणा, अब बिलों में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म

चंडीगढ़ । भारत सरकार द्वारा देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की पहल के लिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश को चुना गया था. जिसमें हरियाणा में 10 लाख, उत्तर प्रदेश में 40 लाख मीटर लगाए जाने हैं. काफ़ी लंबे समय तक कोविंड के कारण इस काम में ब्रेक लगी हुई थी. लेकिन अब फिर से स्मार्ट मीटर लगाए जाने की कार्यक्रम को तेजी प्रदान की जाएगी. यह बात आज ख़ास बातचीत के दौरान हरयाणा बिजली विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पीके दास ने कही.

SMART METER

उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश में 4 लाख मीटर लगाए जा चूके हैं. हरियाणा में बिजली विभाग के 72 के करीब उपभोक्ता हैं. लेकिन भारत सरकार के सौजन्य से 10 लाख मीटर ही लगाए जाएंगे. इसके अलावा बिजली कंपनियां अपने स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था में लगी हुई हैं. इस साल के अंत तक ऐसी व्यवस्था कर पाने में सफलता हासिल हो जाएगी कि विभाग अपने स्तर पर हर साल प्रदेश में 12 से 15 लाख मीटर लगा दे. दास ने बताया कि अब जो भी नए कनेक्शन दिए जाएंगे या खराब जले हुए मीटर जो बदले जाएंगे उन स्थानों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे.

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पीके दास ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद त्रुटियों और गलतियों की संभावना बिल्कुल खत्म हो जाएंगी. हम अपने दफ्तर से ही मीटर की रीडिंग ले सकेंगे और साथ ही साथ सभी उपभोक्ताओं के ईमेल और फ़ोन नंबर हम अपने रिकॉर्ड में शामिल करेंगे. जिससे हम उपभोक्ताओं के ईमेल या फ़ोन पर बिल की पीडीएफ़ भेज देंगे. साथ ही साथ डिजिटल पेमेंट करने के लिए भी सभी उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा.

जो भी उपभोक्ता ऑनलाइन पेमेंट करेगा उसके पिछले छह माह का डाटा भी भेजा जाएगा. यानी पहले की तरह उपभोक्ताओं को रसीद संभालकर रखने की गुंजाइश बिल्कुल खत्म हो जाएगी. साथ ही कंप्यूटर द्वारा ही रीडिंग लिए जाने के कारण मीटर रीडरों की आवश्यकता खत्म हो जाएगी और ये चीज़ें भी खत्म हो जाएगी कि उपभोक्ता का घर बंद था या दिखाई नहीं दे रहा था। युमन डाटा एंट्री नहीं करेगा कंप्यूटर बनाएगा. इस प्रकार सभी प्रकार की दिक्कतें, शिकायतें खत्म हो जाएंगी.

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दास ने बताया कि प्रदेश के लगभग 70 फीसदी गांव जगमग योजना के तहत आ चूके हैं. जहाँ 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. हम उन्हें योजना के तहत कई प्रकार की सहूलियत दे देते हैं. लेकिन साथ ही साथ हमने शर्त भी रखी है कि वे बिल की अदायगी ठीक रखेंगे तो ही उन्हें 24 घंटे बिजली मिलेंगी. बिजली गाँव में से 10 से 15 फीसदी और गांव भी इस योजना के अंतर्गत आने के लिए अदायगी करना चाहते हैं. धीरे धीरे उपभोक्ताओं का नजरिया अब बदलने लगा है. अभी बिजली लेकर पैसे देकर एक बेहतर जिंदगी बिताने की जरूरत सबको समझ में आ रही है.

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पीके दास के अनुसार बारिश आने से पहले करीब 24 करोड़ यूनिट बिजली 1 दिन में सप्लाई की जा रही थी जो कि आज 19 से 20 करोड़ के बीच की लागत है. बारिश के दिनों को ध्यान में रखते हुए हर साल पहले ही कोयले का बड़ा स्टॉक इकट्ठा कर लिया जाता है ताकि कोयले की खान वाले क्षेत्र में बाहर इतनी आने पर या ट्रेन के आने जाने से किसी प्रकार की रुकावट आने पर बिजली उत्पादन के काम में बाधा न पड़े. आज हमारे पास लगभग एक महीने से अधिक का कोयले का स्टॉक एडवांस में पड़ा है. उन्होंने बताया कि आज हिसार की एक, यमुना नगर कि दोनों और पानीपत थर्मल की दो यूनिट चलाई जा रही हैं. जोकि पर्याप्त बिजली का उत्पादन हो रहा है.

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