चंडीगढ़ | हरियाणा में खरीफ फसलों की गिरदावरी का काम आज से शुरू होना है, लेकिन डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर राजस्व पटवारियों ने सरकार के सामने कई गंभीर आपत्तियां रखी हैं. दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन, हरियाणा ने भू- अभिलेख विभाग के निदेशक को पत्र भेजकर डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम निजी एजेंसी से कराने की मांग की है. सर्वे के दौरान प्रत्येक खसरा नंबर पर करीब 10 मीटर दूर जाकर फसल की फोटो लेकर उसे अपलोड करना होता है.

अगस्त में धान के खेतों में पानी भरा होने के कारण कर्मचारियों के लिए खेतों के अंदर पहुंचना मुश्किल है. बरसात के मौसम में खेतों में जहरीले सांप और अन्य जीव- जंतुओं का खतरा भी बना रहता है. कई जगह कांटेदार झाड़ियां और बिजली की तारें भी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं.
पटवारियों की ड्यूटी
एसोसिएशन ने बताया कि 1 अगस्त से सभी पटवारियों की ड्यूटी जनगणना में भी लगाई गई है. ऐसे में निर्धारित समय के भीतर डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा करना मुश्किल होगा. पटवारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों और नियमों में जरूरी बदलाव किए बिना डिजिटल क्रॉप सर्वे कराना व्यावहारिक नहीं है. एसोसिएशन के अनुसार, अभी तक अधिकांश पटवारियों को डिजिटल सर्वे के लिए जरूरी टैबलेट भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. ऐसे में समय पर सर्वे पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा.
निजी एजेंसी को जिम्मा
सरकार से मांग की गई है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर डिजिटल क्रॉप सर्वे का जिम्मा निजी एजेंसी को दिया जाए. हरियाणा में खरीफ सीजन के दौरान 30 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलों की बिजाई होती है. अब तक 29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में फसल बोई जा चुकी है. यदि डिजिटल क्रॉप सर्वे समय पर पूरा नहीं हुआ तो इसका असर किसानों से जुड़े कार्यों पर पड़ सकता है और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.