चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक मजबूत, स्मार्ट और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 912.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिजली अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी है. यह मंजूरी संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत दी गई है. मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई वितरण सुधार समिति की बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई. अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजा जाएगा. बैठक में बताया गया कि हरियाणा ने बिजली क्षेत्र सुधारों में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति की है.

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने एटीएंडसी लॉस को 16.93 प्रतिशत से घटाकर 9.54 प्रतिशत कर दिया है जबकि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने इसे 17.21 प्रतिशत से घटाकर 9.33 प्रतिशत तक लाया है. यह दोनों आंकड़े राष्ट्रीय औसत 15.04 प्रतिशत से बेहतर हैं.
डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम लागू
ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बताया कि प्रदेश की बिलिंग दक्षता भी 82.95 प्रतिशत से बढ़कर 90.12 प्रतिशत हो गई है जो राष्ट्रीय मानक 87.59 प्रतिशत से अधिक है. वहीं, संग्रहण दक्षता लगभग 100 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है. नई मंजूर परियोजनाओं में पलवल और नूंह जिलों में लाइन लॉस कम करने के लिए 169 करोड़ रुपये, 30 नए 33 केवी सबस्टेशन स्थापित करने तथा 72 मौजूदा सबस्टेशनों के उन्नयन के लिए 414 करोड़ रुपये और हिसार सहित अन्य शहरों में स्काडा एवं डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के लिए 329.70 करोड़ रुपये शामिल हैं.
रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव
यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि इन परियोजनाओं से बिजली प्रणाली में करीब 1,175 एमवीए अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जुड़ जाएगी. इससे घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को अधिक बिजली आपूर्ति मिलेगी. साथ ही, स्काडा और डीएमएस जैसी आधुनिक तकनीकों से बिजली नेटवर्क की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी और खराबियों का तेजी से पता लगाकर आपूर्ति बहाल की जा सकेगी. मुख्य सचिव ने सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं.