चंडीगढ़ | हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों के अच्छे नंबर लाने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ सही मार्गदर्शन भी जरूरी है। खासकर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को अतिरिक्त मदद मिले, तो उनके नतीजों में सुधार हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने नई तैयारी शुरू की है। बता दें कि हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बेहतर बनाने के लिए ‘मिशन सफलता’ लागू करने का फैसला किया है।

इसके तहत शून्य प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की संख्या खत्म करने, 100 प्रतिशत रिजल्ट देने वाले स्कूलों की संख्या दोगुनी करने और कमजोर छात्रों के अंकों में सुधार करने पर जोर रहेगा। विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विजय सिंह दहिया ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक
विभाग के निर्देशों के अनुसार, 1 जनवरी से बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने तक 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को गणतंत्र दिवस समारोह को छोड़कर अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल नहीं किया जाएगा। इन कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से छूट मिलेगी, ताकि वे पढ़ाई, रिविजन और छात्रों की शंकाएं दूर करने पर ध्यान दे सकें।
होंगे ये 5 बड़े काम
- हाफ-इयरली और प्री-बोर्ड के परिणामों के आधार पर कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर अतिरिक्त कक्षाएं लगेंगी। कंपार्टमेंट वाले छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा के बाद समर कैंप भी आयोजित किए जाएंगे।
- हर तिमाही जिला स्तर पर कार्यशालाएं होंगी। इनमें 100 प्रतिशत परिणाम देने वाले शिक्षक दूसरे शिक्षकों को बेहतर पढ़ाने और लेसन प्लान तैयार करने के तरीके बताएंगे।
- विषय शिक्षक की कमी वाले स्कूलों में स्मार्ट टीवी और डिजिटल बोर्ड से वीडियो लेक्चर दिखाए जाएंगे। जरूरत के अनुसार नजदीकी स्कूलों से विजिटिंग टीचर भी भेजे जाएंगे।
- पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) के जरिए बच्चों की पढ़ाई में आ रही कमियों पर चर्चा होगी। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की मदद से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
- 100 प्रतिशत रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। उनके नाम स्कूलों के ग्रुप में भी साझा किए जाएंगे।