कैथल | देशभर में 9 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा. इसे लेकर अभी से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. भाई- बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक यह त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और बदले में भाई जीवन भर रक्षा का वचन देते हैं.
द्रौपदी और कृष्ण से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि महाभारत में द्रौपदी द्वारा कृष्ण को राखी बांधने से इस परंपरा की शुरुआत हुई थी. आज भी हरियाणा में एक ऐसा गांव है जहां यह पर्व नहीं मनाया जाता. कैथल जिले का सिरसल गांव रक्षाबंधन से अछूता है. इसके पीछे एक ऐतिहासिक कारण जुड़ा है. गांव के लोगों के अनुसार, कई साल पहले जब हिंदुस्तान पर मुगलों का शासन था और औरंगजेब देश का नेतृत्व कर रहा था, उस समय इस गांव सहित आसपास के 7- 8 गांवों पर भी मुस्लिम शासकों का अधिकार था. मुख्य रूप से यहां औरंगजेब का ही शासन था.
खूबसूरत घोड़ी बनी मौत की वजह
इस गांव में एक व्यक्ति के पास एक सुंदर घोड़ी थी, जिसकी चर्चा दूर- दूर तक थी. जब औरंगजेब को इस घोड़ी की जानकारी मिली, तो उसने उस ग्रामीण को दरबार में हाजिर होने का आदेश दिया. ग्रामीण जब दरबार में पहुंचा, तो औरंगजेब ने उसे घोड़ी को राजमहल में छोड़ देने के बदले धन- संपत्ति देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन ग्रामीण ने इंकार कर दिया. इस पर औरंगजेब क्रोधित हो गया और उसने दरबार में आए सभी ग्रामीणों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया.
रक्षाबंधन पर हुआ नरसंहार
कुछ लोग वहां से भागकर जान बचा पाए, लेकिन वे कभी गांव लौट कर नहीं आए और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में बस गए. गांववालों की मान्यता है कि जिस दिन यह नरसंहार हुआ, वह दिन रक्षाबंधन था. तभी से इस गांव में यह पर्व नहीं मनाया जाता. ग्रामीणों का कहना है कि मारे गए लोग शांडिल्य और टुरण गोत्र से संबंधित थे, इसलिए इन गोत्रों के लोग यह पर्व नहीं मनाते. हालांकि, गांव की अन्य जातियों के लोग इस त्योहार को मनाते हैं.
