क्या नए रूप में वापिस आ रहे हैं कृषि कानून? केन्द्रीय कृषि मंत्री के इस बयान से किसानों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । तीनों कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों द्वारा एक साल से भी अधिक समय तक चलाए गए आंदोलन की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी और इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के दिए एक बयान ने इस चिंगारी को फिर से भड़का दिया है. कृषि मंत्री तोमर नागपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे जहां उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान दिया है.

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इस कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि देशभर में लाखों किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद पिछले महीने सरकार द्वारा वापस ले लिए गए तीन कृषि कानूनों को नया रूप दिया जा सकता है. उन्होंने इस दौरान कहा कि हमने तो एक ही कदम तो पीछे खींचा है, फिर आगे बढ़ेंगे क्योंकि किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं.

सरकार निराश नहीं बल्कि आगे की सोच रही है

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने विवादास्पद कानूनों को रद्द करवाने के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए हम ये बिल लेकर आए थे लेकिन कुछ लोगों को ये पसंद नहीं आएं. यें आजादी के 70 साल बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में एक बड़े सुधार वाला कदम था लेकिन सरकार बिल्कुल भी निराश नहीं हैं. हम एक कदम पीछे हटे है,हम फिर आगे बढ़ेंगे क्योंकि किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं.

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हालांकि तोमर के इस बयान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पलटवार करते हुए कहा है कि यूपी चुनाव के बाद सरकार इन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापिस ला सकती है. उन्होंने कृषि मंत्री के इस बयान को किसानों के लिए खतरनाक बताया. सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने यूपी और पंजाब चुनावों में डार के डर से इन कृषि कानूनों को वापिस लेने का फैसला लिया था.

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19 नवंबर को हुआ था ऐलान

पिछले महीने 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपी और पंजाब में चुनाव से ठीक तीन महीने पहले तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने का ऐलान किया था. हालांकि सरकार के अचानक से लिए गए इस फैसले को विपक्षी पार्टियां चुनाव में फायदा लेने से जोड़कर देख रही है. इन विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों द्वारा एक साल तक धरना प्रदर्शन किया गया था.

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