नई दिल्ली | भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपने इतिहास में एक और नया अध्याय लिखने जा रही है. कटरा से कश्मीर तक रेलवे लाइन बिछाने के बाद अब भारतीय रेलवे पहाड़ी इलाकों में एक और बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने की दहलीज पर खड़ी हैं. पहाड़ों के बीच रेलवे लाइन बिछाने के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन रेलवे ने सभी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इस पड़ाव पर पहुंचने में सफलता हासिल कर ली है.
17 सुरंगों से गुजरेगी ट्रेन
करीब 230 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन का 125 किलोमीटर हिस्सा बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि इसमें से 105 किलोमीटर का रास्ता सुरंग से होकर गुजरता है. मिली जानकारी के अनुसार, 2 मई से केदारनाथ और 4 मई से बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल जाएंगे. इसी के साथ चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी.
वर्तमान में इस यात्रा की डगर बेहद कठिन मानी जाती है. ऋषिकेश से केदारनाथ की दूरी 229 किलोमीटर हैं और इस दूरी को तय करने के लिए बस या निजी वाहनों को दुर्गम रास्तों पर सफर करना पड़ता है. इस सफर को पूरा करने में 8 से 10 घंटे तक समय लगता है, लेकिन भारतीय रेलवे का यह प्रोजेक्ट पूरा होने पर इस सफर को तय करने में लगभग 4 घंटे का ही समय लगेगा.
ऋषिकेश से बिछेगी लाइन
351 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन को भारतीय रेलवे ने 4 हिस्सों में बांटा हैं. पहला ऋषिकेश से मनेरी गंगोत्री तक 131 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन, दूसरी मनेरी से यमुनोत्री तक 46 किलोमीटर, तीसरी कर्ण प्रयाग से सोनप्रयाग तक 99 किलोमीटर और चौथा हिस्सा सालकोट से जोशीमठ तक 75 किलोमीटर लंबा होगा.
ज्यादातर काम पूरा
ऋषिकेश से चारधाम के रास्ते में ट्रेन कुल 17 सुरंगों से होकर गुजरेगी और इसका ज्यादातर काम पूरा हो चुका है. इस रेलवे लाइन पर 27 जगहों पर स्टेशन बनाए गए हैं. इसमें से 10 स्टेशन सुरंग के अंदर बनाए जाएंगे और कर्णप्रयाग तक बनाए जाने वाले 12 स्टेशन में से सिर्फ 2 ही जमीन से ऊपर बनाए जाएंगे.
भारतीय रेलवे का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ऋषिकेश से महज 4 घंटे में ही कर्णप्रयाग और 6 घंटे में जोशीमठ तक पहुंचा जा सकेगा, जहां से केदारनाथ की दूरी बेहद कम रह जाएगी. रेलवे के इस प्रोजेक्ट के साथ ही केदारनाथ तक रोप- वे भी बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट पर 74 हजार करोड़ रुपए की लागत राशि खर्च होगी.
