नई दिल्ली | नए साल यानि 2025 में किसानों को महंगाई के झटके से जूझना पड़ सकता है. खेती में यूरिया के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले DAP खाद की कीमत अगले महीने यानि जनवरी में बढ़ोतरी हो सकती है. किसानों को अभी 50 किलोग्राम वाले एक बैग डीएपी खाद के लिए 1350 रूपए चुकाने पड़ते हैं, लेकिन इसमें 200 रूपए की बढ़ोतरी हो सकती है.
केंद्र सरकार देती है सब्सिडी
केंद्र सरकार किसानों को सस्ते मूल्य पर डीएपी खाद उपलब्ध कराने के लिए 3500 रूपए प्रति टन की दर से विशेष सब्सिडी का लाभ दे रही है, जिसकी अवधि कल यानि 31 दिसंबर को खत्म हो रही है. हालिया दिनों में डीएपी बनाने में इस्तेमाल होने वाले फास्फोरिक एसिड एवं अमोनिया के मूल्य में 70% तक की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर खाद की कीमतों पर देखा जा रहा है.
दिया जाता है विशेष अनुदान
फॉस्फेट और पोटाश युक्त (पीएंडके) उर्वरकों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल 2010 से पोषक- तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना क्रियान्वित हैं. इसके तहत, वार्षिक आधार पर निर्माता कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है. पीएंडके क्षेत्र नियंत्रण मुक्त है और एनबीएस योजना के तहत कंपनियां बाजार के अनुसार उर्वरकों का उत्पादन और आयात कर सकती हैं.
इसके अलावा, किसानों को सस्ते मूल्य पर निर्बाध DAP खाद उपलब्ध कराने के लिए एनबीएस सब्सिडी के अलावा डीएपी पर विशेष अनुदान दिया जाता है. इसकी अवधि का विस्तार अगर नहीं हुआ, तो 1 जनवरी 2025 से डीएपी खाद का महंगा होना तय माना जा रहा है.
उद्योग जगत को उठाना पड़ेगा बोझ
अगर विशेष सब्सिडी जारी रखने पर विचार नहीं किया गया, तो उद्योग जगत को इसका बोझ उठाना पड़ेगा. पिछले कुछ समय से डॉलर की तुलना में रुपये का अवमूल्यन हो रहा है. वैश्विक बाजार में अभी डीएपी का मूल्य 630 डालर प्रति टन है. सिर्फ रुपये के कमजोर होने के चलते आयात लागत में लगभग 1200 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हो गई हैं. इस दौरान यदि सब्सिडी का लाभ बंद कर दिया गया, तो प्रति टन लगभग 4700 रूपए की लागत में वृद्धि होगी. ऐसे में प्रति बैग डीएपी खाद की कीमत में 200 रूपए की बढ़ोतरी हो सकती है.
