रोहतक | किसी भी माता-पिता के लिए अपनी छोटी बच्ची को खोने से बड़ा दुख शायद ही कोई हो। जिस घर में कुछ दिन पहले तक बेटी की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब मातम पसरा है। हरियाणा के महम में एक परिवार पर ऐसा ही दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हालांकि, इस मुश्किल समय में माता-पिता ने अपनी बेटी की आंखें दान करने का फैसला लेकर मानवता की मिसाल पेश की है।

दरअसल, रोहतक जिले के महम के वार्ड नंबर छह में रहने वाले दीपक परूथी और उनकी पत्नी रीना की डेढ़ साल की बेटी आस्था की मौत हो गई। बेटी के निधन के बाद परिवार ने नेत्रदान कराने का निर्णय लिया, जिससे जरूरतमंद बच्चों को आंखों की रोशनी मिलने की उम्मीद बन सके।
बुखार से थी पीड़ित
परिजनों के अनुसार, आस्था को पिछले दो दिनों से तेज बुखार था। इस दौरान उसे उल्टियां भी होने लगी थीं। इसके बाद बच्ची की मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से परिवार गहरे सदमे में है। इसी बीच माता-पिता ने चिकित्सकों से संपर्क कर बेटी की आंखें दान करने की इच्छा जताई। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन यदि उसके नेत्रदान से किसी जरूरतमंद को देखने का अवसर मिलता है तो इससे उन्हें कुछ सांत्वना मिलेगी।
महम में तीसरा मामला
दीपक का परिवार डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हुआ है। डेरा अनुयायी रामदास इंसा के अनुसार, महम में यह नेत्रदान का तीसरा मामला है। इससे पहले भी दो लोगों का नेत्रदान कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि संस्था लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने का काम करती है। वहीं, महम नगर पालिका के उपप्रधान बसंत लाल गिरधर भी लोगों को नेत्रदान और देहदान के लिए जागरूक करते हैं। वह पहले भी दो लोगों के नेत्रदान में सहयोग कर चुके हैं। इसके अलावा, सामाजिक कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में भी लोगों को इसके लिए प्रेरित करते हैं।