ज्योतिष | हिंदू धर्म में अमावस्या (Amavasya) को विशेष महत्व प्राप्त है. हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय फाल्गुन का महीना चल रहा है. फाल्गुन के महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दर्श अमावस्या या फाल्गुन अमावस्या कहा जाता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार ही यह हिंदू वर्ष की आखिरी अमावस्या है, क्योंकि इसके बाद चैत्र महीने की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में यह और भी खास हो जाती है.
हिंदू कैलेंडर की अंतिम अमावस्या
चैत्र महीने के साथ ही हिंदू कैलेंडर का नया साल शुरू हो जाता है. दर्श अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा अर्चना और पिंडदान करना काफी अच्छा माना जाता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. आज हम आपको बताएंगे कि दर्श अमावस्या कब है और इसका क्या महत्व रहने वाला है.
अमावस्या को लेकर बना कंफ्यूजन
दर्श अमावस्या को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसकी शुरुआत 27 फरवरी को सुबह 8:54 मिनट से हो रही है और इसका समापन 28 फरवरी को सुबह 6:14 मिनट पर होगा. यह अमावस्या 27 तारीख को ही मनाई जाएगी. इस दिन दो शुभ योग भी बन रहे है. पहला शिवयोग दूसरा सिद्ध योग, जो इस अमावस्या को और भी खास बना रहा है.
इस प्रकार करें पूजा- अर्चना
पंडित विश्वनाथ जी बताते हैं कि अमावस्या के दिन विशेष तौर पर पवित्र नदी में स्नान करना काफी अच्छा माना जाता है. फाल्गुन अमावस्या पर स्नान करने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:08 से 5:58 मिनट तक रहेगा. अगर किसी कारणवश समय पर स्नान न हो पाए, तो आप दोपहर 12:11 से 12:57 मिनट के बीच स्नान कर सकते हैं. इस दौरान भी शुभ मुहूर्त रहने वाला है, जोकि पितरों को प्रसन्न करने के लिए यह दिन काफी अच्छा माना जाता है. अगर आपके पितरो भी आपसे नाराज है, तो आप इस दिन तर्पण करके उन्हें मना सकते हैं.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
