चंडीगढ़ | कई जिलों में जल संकट से जूझ रहे हरियाणा के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को केंद्र सरकार (Central Govt) के गृह सचिव की अध्यक्षता में 2 मई को हुई बैठक के फैसले का पालन करने का आदेश दिया है. इसमें हरियाणा के लिए 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने का फैसला हुआ था. हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फ़ैसले में कहा कि भाखड़ा नंगल बांध और लोहंड कंट्रोल रूम के संचालन में राज्य सरकारें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं हैं.
पिछले महीने 23 तारीख को बीबीएमबी की तकनीकी समिति ने हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया था. इसमें दिल्ली और राजस्थान के हिस्से का पानी भी शामिल हैं. पंजाब सरकार ने इस फैसले का विरोध जाहिर करते हुए कहा था कि हरियाणा और राजस्थान अपनी निर्धारित हिस्सेदारी से ज्यादा पानी की मांग कर रहे हैं.
हस्तक्षेप से बचें पंजाब
बीती 1 मई को पंजाब पुलिस द्वारा कथित रूप से भाखड़ा नंगल बाँध और लोहंड कंट्रोल रूम पर नियंत्रण लेने की घटना ने स्थिति को और जटिल बना दिया था जिसके बाद बीबीएमबी ने इसे अपने अधिकारों में अवैध हस्तक्षेप करार देते हुए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बांध पर सुरक्षा के लिहाज से पंजाब सरकार पुलिस को तैनात कर सकती हैं, लेकिन बीबीएमबी के कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बांध की सुरक्षा के नाम पर उसके संचालन में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है.
फैसले का पालन करें पंजाब सरकार
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह 2 मई को हुई बैठक में लिए गए फैसले का पालन करें, जिसमें हरियाणा के लिए 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने पर फैसला हुआ था. कोर्ट ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड नियम, 1974 के तहत बीबीएमबी एक केंद्रीय निकाय है और उसका नियंत्रण केंद्र सरकार के अधीन है. किसी भी असहमति की स्थिति में प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार के जरिए ही आपत्ति दर्ज करनी चाहिए, न कि सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए.
