हरियाणा में पंचायती जमीन पर मालिकाना हक के लिए इस तारीख तक करें आवेदन, उसके बाद छूटेगा कब्जा

चंडीगढ़ | हरियाणा में पंचायती जमीन पर कब्जा किए बैठे लोगों को मालिकाना हक देने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से शुरु की गई नई योजना की समय- सीमा इसी महीने की 16 तारीख को खत्म हो रही है. जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी ने बताया कि इस अवधि तक जिन लोगों ने पंचायत की शामलात भूमि पर बने अपने अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए आवेदन नहीं किया, उनके खिलाफ आने वाले समय में मकान तोड़ने और कब्जा हटाने की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.

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उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा अधिकतम 500 वर्ग गज तक की जमीन को ही संबंधित व्यक्ति के नाम कलेक्टर रेट के आधार पर नियमित करने का फैसला लिया गया है. शर्त यह है कि कुल कब्जा की गई जमीन का कम से कम 25% हिस्सा निर्मित होना चाहिए और शेष खुला एरिया उसी परिसर का हिस्सा हो.

हरियाणा में यह रहेगी आवेदन की प्रक्रिया

आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित ग्राम पंचायत को 20 दिनों के भीतर 3/4 बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है, जिसके बाद ग्राम सभा की बैठक में गांव के 1/10 सदस्यों की मौजूदगी में इसकी पुष्टि की जाती है. इस प्रक्रिया में भूमि उपयोग योजना तैयार करना अनिवार्य है. ग्राम सचिव द्वारा प्रस्ताव बीडीपीओ को भेजने के बाद बीडीपीओ द्वारा साइट का निरीक्षण किया जाएगा. फिर फाइल को जिला उपायुक्त को भेजा जाएगा.

यदि वह इसे उचित समझते हैं, तो वे सिफारिश के साथ इसे मुख्यालय भेजेंगे. निदेशालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद 7 दिनों के भीतर आवेदक के पक्ष में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि तालाब, आम रास्ते, फिरनी या किसी विशेष उद्देश्य के लिए आरक्षित भूमि पर किए गए निर्माण को मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा.

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इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

सरकार की नीति के अनुसार, जिस व्यक्ति का 31 मार्च 2004 से पहले पंचायत भूमि पर मकान बना हुआ है उसे उस भूमि की कीमत वर्ष 2004 के कलेक्टर रेट के डेढ़ गुना के बराबर राशि ग्राम पंचायत को अदा करनी होगी. यदि 2004 का कलेक्टर रेट उपलब्ध नहीं है तो उसके बाद के उपलब्ध वर्षों के रेट के आधार पर गणना की जाएगी.

आवेदन के साथ जमाबंदी, खसरा गिरदावरी, मकान का साइट प्लान (कवर्ड और अन कवर्ड एरिया के साथ), मकान की वर्तमान फोटो और यह साबित करने वाले दस्तावेज कि कब्जा 31 मार्च 2004 से पहले का है (जैसे बिजली या पानी का बिल या वोटर कार्ड) संलग्न करना अनिवार्य है.

जिन लोगों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे 16 जनवरी तक ग्राम पंचायत के माध्यम से अपना आवेदन जमा कराएं. इस तारीख के बाद उन सभी जगहों को चिह्नित कर कब्जा मुक्त कराया जाएगा जो योजना के तहत नियमित नहीं होंगे- हरि प्रकाश बंसल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी

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Anita Poonia
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मेरा नाम अनीता पूनिया है. मैं पिछले 2 साल से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हूँ. वर्तमान मे Haryana E Khabar न्यूज वेबसाइट के लिए कंटेंट राइटर का काम कर रही हूँ.