फरीदाबाद | औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में इस समय 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला आयोजित है, जो 15 फरवरी तक रहेगा. मेले में इस बार बांग्लादेश से आई जामदानी साड़ियां दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही है. मेले में जामदानी साड़ियों की स्टॉल पर खरीदारी के लिए दिनभर भीड़ लगी रहती है. इससे ये साबित होता है कि कला और परंपरा किसी सीमा से बंधी नहीं रहती है. मेले में पांव रखते ही हर तरफ से अलग-2 राज्यो और देशों की खुशबू, रंग और संस्कृति महसूस होती है. मिट्टी की भिनी खुशबू तो कहीं कपड़ो की कड़ाई- बुनाई मन को लुभा रही है.
बांग्लादेशी हस्तशिल्पकारों का छाया जादू
जामदानी एक पारंपरिक और हाथ से बुनी जाने वाली बुनाई है, जो अपनी सुंदरता के कारण विख्यात है. कारीगरों के अनुसार जामदानी साड़िया पूरी तरह से बुनी जाती है जिसमें महीन धागों से जटिल और आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते है. यह बुनाई बांग्लादेश पारंपरिक कला मानी जाती है और इसकी गिनती दुनिया की प्रसिद्ध टेक्सटाइल आर्ट में होती है. इस साड़ियों की कीमत डिजाइन और मेहनत के हिसाब से तय होती है.उनके पास 4 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक की साड़ियां है.
जामदानी साड़ियों की हो रही खूब बिक्री
स्टॉक संचालकों का कहना है कि मेले के शुरुआती दिनों से ही महिलाओं की नजर जामदानी साड़ियों पर टिकी हुई है. खासकर दिल्ली- एनसीआर से आने वाली महिलाएं इन साड़ियों में काफी रुचि दिखा रहे है. आयोजकों का कहना है कि इस तरह से अंतरराष्ट्रीय उत्पाद सूरजकुंड मेले की पहचान को ओर मजबूत करते है और कारीगरों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाते है.
