ज्योतिष डेस्क | मंदिर में शिवलिंग दर्शन और पूजा- अर्चना करते समय धार्मिक नियमों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि विधि- विधान से पूजा करने पर ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है और साधक को पूर्ण फल मिलता है. विशेष रूप से शिव मंदिर में जलाभिषेक का अपना अलग महत्व है. अधिकांश श्रद्धालु घर से लोटे में जल लेकर जाते हैं या मंदिर परिसर से जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं लेकिन जल चढ़ाने के बाद खाली लोटा घर लाना चाहिए या नहीं… इसे लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं.

शिव महापुराण में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद खाली लोटा लेकर घर लौटना शुभ नहीं माना जाता. कहा जाता है कि ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और व्यक्ति को कई प्रकार के दोषों का सामना करना पड़ सकता है.
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जलाभिषेक के बाद लोटे में थोड़ा जल अवश्य भर लेना चाहिए. मान्यता है कि खाली लोटा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. यदि इसे खाली अवस्था में घर लाया जाए तो यह नकारात्मकता घर के वातावरण को प्रभावित कर सकती है. शिव पूजा में घर से जल भरकर ले जाना अधिक शुभ माना गया है. जलाभिषेक के बाद लोटे को कुछ देर शिवलिंग के अर्घ्य के पास रख देने की भी परंपरा बताई गई है, ताकि उसमें थोड़ा पवित्र जल आ जाए. यही जल लेकर घर लौटना शुभ माना जाता है.
यदि किसी कारणवश जल साथ नहीं ला सकते, तो लोटे में पूजा के फूल, बेलपत्र या अन्य पवित्र पत्तियां रखकर भी घर लौट सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि शिव मंदिर से कभी भी खाली हाथ वापस नहीं आना चाहिए.
मंदिर से लाए गए जल का क्या करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर से लाया गया पवित्र जल घर के मुख्य द्वार पर छिड़कना शुभ माना जाता है. इसके अलावा रसोई, पूजा घर, सभी कमरों और सीढ़ियों के आसपास भी इस जल का छिड़काव किया जा सकता है. मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता, वास्तु दोष और कलह-कलेश दूर होते हैं. यदि आपका व्यापार या दुकान है, तो वहां भी इस जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से सुख- समृद्धि और व्यापार में उन्नति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है.
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद खाली लोटा घर नहीं लाना चाहिए. जलाभिषेक के बाद लोटे में थोड़ा पवित्र जल या पूजा सामग्री रखकर घर लौटना शुभ माना जाता है. हालांकि, यह सभी मान्यताएं धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं.
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Haryana E Khabar किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)