चंडीगढ़ | हरियाणा में प्राइवेट स्कूलों की तरह अब सरकारी स्कूलों में एडमिशन बढ़ाने के लिए गुरुजी भी घर- घर जाएंगे. शिक्षा विभाग की तरफ से जीरो ड्राप आउट का लक्ष्य तय किया गया है. बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक नामांकन की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है. ड्राप आउट बच्चों को स्कूल भवन तक लाने में पंचायतें और स्कूल प्रबंधन समितियां भी सहयोग करेंगे.
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की तरफ से सभी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, स्कूल मुखियाओं और स्कूल प्रबंधन समिति को लेटर लिखकर राज्य को जीरो ग्रुप आउट बनाने तथा सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सेशन 2026- 27 के तहत प्रवेश उत्सव कार्यक्रम आयोजित करने के लिए निर्देशित किया गया है.
हरियाणा में 20 अप्रैल तक चलेगा अभियान
साल 2030 तक बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक 100 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का टारगेट निर्धारित किया गया है, जिसके तहत तीन से 18 साल तक के सभी बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराने पर विशेष बल दिया गया है. उच्चतर शिक्षा में इस लक्ष्य को 34 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करना होगा. पूरे राज्य में 23 मार्च को प्रवेश उत्सव अभियान शुरू हो चुका है जोकि 20 अप्रैल तक चलेगा. विभाग की तरफ से साफ हिदायत दी गई है कि शिक्षकों को अपने- अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान करनी होगी, जो अभी तक स्कूल से बाहर है या ड्रापआउट की केटेगरी में शामिल हैं.
बच्चों के घर जाकर करेंगे नॉमिनेशन
ऐसे बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा. प्रवेश उत्सव अभियान सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं होगा, बल्कि शिक्षक और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य बच्चों के घर जाकर उनका नॉमिनेशन करेंगे. इस अभियान में विशेष रूप से उन परिवारों पर ध्यान दिया जाएगा, जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए उदासीन हैं या आर्थिक- सामाजिक कारणों की वजह से बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं. ऐसे अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से समझाकर बच्चों को स्कूल लाने की कोशिश की जाएगी.
