चंडीगढ़ | हरा- भरा हरियाणा को चरितार्थ करने की दिशा में सूबे की नायब सैनी सरकार ने एक और नई पहल की शुरुआत की हैं. इस कड़ी में पर्यावरण संतुलन को प्रोत्साहन के लिए प्रतिपूरक वनीकरण प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) के तहत 298 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी प्रदान की गई है.

इस योजना के तहत, 1882 हेक्टेयर भूमि पर 20 लाख पौधे लगाए जाएंगे. इसके अलावा, 4518 हेक्टेयर क्षेत्र में पहले से लगाए गए पौधों के संरक्षण और रखरखाव पर भी फोकस रहेगा. वहीं, शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण और तापमान वृद्धि को कम करने के लिए 16 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी तकनीक से घने शहरी वन विकसित किए जाएंगे.
क्या हैं मियावाकी तकनीक?
मियावाकी तकनीक से विकसित होने वाले वन शहरी और अर्थ- शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र बढ़ाने और वायु गुणवत्ता सुधारने में सहायक होंगे. मियावाकी तकनीक बहुत कम जगह में घने, देशी और तेजी से बढ़ने वाले जंगल विकसित करती है. इसमें पारंपरिक तरीकों की तुलना में 10 गुना तेजी से वन विकसित होते हैं जो 20 से 30 सालों में ही आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बन जाते हैं.
बनेगी 20 नई वन चौकी
वन और वन्यजीव संरक्षण को पुख्ता बनाने के लिए 20 नई वन चौकी स्थापित करने, 60 अतिरिक्त वन रक्षकों की तैनाती और गश्ती वाहनों की खरीद को मंजूरी दी गई है. इसके अतिरिक्त घायल वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू वाहन तथा फील्ड स्टाफ के लिए आवासीय क्वार्टर बनाने की भी स्वीकृति दी गई है.
योजना के तहत, ‘हरितिमा हरियाली का रंग, हरियाणा के संग’ के नाम से पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा, जिसमें सरकारी स्कूलों के कक्षा छठी से 10वीं तक के छात्रों को शामिल किया जाएगा. प्रदेशभर में 70 ईको कैंप आयोजित किए जाएंगे, जिनमें छात्रों को वन क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों और ईको-पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा.
हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 22 जिलों के वन कार्यालयों में 15 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा सिस्टम स्थापित किए जाएंगे. इस पहल से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने, परिचालन लागत घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी.