हरियाणा का गौरव पानीपत, टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने बदली लाखों की जिंदगी; दुनियाभर में बना चुका है पहचान

पानीपत | हरियाणा का पानीपत शहर आज देश की प्रमुख टेक्सटाइल नगरी के रूप में पहचान बना चुका है. यहां का हैंडलूम और पावरलूम उद्योग घरेलू बाजार होने का साथ- साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी रखता है. शहर में करीब 8 हजार सूक्ष्म और लघु इकाइयां सक्रिय हैं, जहां बेडशीट, पर्दे, कंबल, सोफा कवर और कारपेट जैसे उत्पाद बड़े पैमाने पर तैयार किए जाते हैं. यह उद्योग लाखों लोगों के रोजगार का आधार बना हुआ है. पानीपत का टेक्सटाइल सेक्टर आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. स्मॉल स्केल इंडस्ट्री का करीब पांच हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट और लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का घरेलू कारोबार है.

Cloth Shop Bajar Market 2

इन इकाइयों में ढाई से तीन लाख मजदूर काम करते हैं. वहीं, मीडियम स्तर की करीब 150 इकाइयां भी सक्रिय हैं, जिनका कुल कारोबार करीब दो हजार करोड़ रुपये तक पहुंचता है और इनमें लगभग 50 हजार लोग रोजगार पाते हैं.

टैक्सटाइल नगरी पानीपत

यहां के उद्योग में हैंडलूम से लेकर ऑटोमेटिक पावरलूम तक का इस्तेमाल होता है. मीडियम उद्योगों में कंबल, मिंक और स्पिनिंग मिल प्रमुख हैं, जबकि छोटे उद्योगों में घरों में इस्तेमाल होने वाले कपड़ा उत्पाद तैयार किए जाते हैं. आधुनिक मशीनों के साथ पारंपरिक कौशल का मेल ही पानीपत की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है. हालांकि, यह दुनिया जितनी रंगीन दिखती है उतनी है नहीं. दरअसल, इतनी बड़ी इंडस्ट्री होने के बावजूद पानीपत के उद्योगों को कुशल श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. समय पर कारीगर न मिलने से उत्पादन प्रभावित होता है और ऑर्डर पूरे करने में दिक्कतें आती हैं. उद्योगपतियों का कहना है कि स्किल्ड और अनस्किल्ड दोनों तरह के श्रमिकों की कमी अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है.

आर्थिक संकट से जूझ रहे छोटे उद्योग

आर्थिक संकट से जूझ रहे छोटे उद्योगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी फंडिंग की है. बिना कोलेटेरल सिक्योरिटी के बैंक आसानी से कर्ज नहीं देते, जिससे छोटे उद्यमियों के लिए अपने कारोबार को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है. वित्तीय संसाधनों की कमी से कई यूनिट्स अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं. पानीपत का उद्योग आज भी बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. बिजली कटौती और तकनीकी खराबियों के कारण उत्पादन रुक जाता है, जिससे नुकसान होता है. खराब सड़कों और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें भी उद्योग की लागत बढ़ा रही हैं.

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सरकार से आशा

सरकार से आशा रखते हुए उद्यमियों का मानना है कि इस सेक्टर के लिए विशेष नीतियां बननी चाहिए. टैक्स में छूट, एक्सपोर्ट ड्यूटी में कमी और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने जैसे कदमों से स्थानीय उद्योग को राहत मिल सकती है. साथ ही सस्ते कर्ज और रॉ मैटेरियल की उपलब्धता भी जरूरी है, ताकि उद्योग प्रतिस्पर्धा में टिक सके. उद्योगपतियों का कहना है कि मनरेगा के कारण श्रमिकों की उपलब्धता और कम हो गई है. उनका सुझाव है कि इस योजना को उद्योगों से जोड़ दिया जाए, जिससे श्रमिकों को रोजगार भी मिले और उद्योगों की जरूरत भी पूरी हो सके.

इंटरनेशनल मार्केट में कड़ी स्पर्धा

पानीपत के उत्पाद क्वालिटी के मामले में बेहतर माने जाते हैं, लेकिन कीमत के मामले में चीन और तुर्की से प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है. इन देशों में टैक्स में छूट मिलने के कारण उनका माल सस्ता पड़ता है, जिससे भारतीय उत्पादों की मांग प्रभावित होती है.

स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि सरकारी योजनाएं अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं. उनका मानना है कि अगर सही सुविधाएं और नीतिगत समर्थन मिले, तो पानीपत का उद्योग और तेजी से आगे बढ़ सकता है. मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि छोटे और मझोले उद्यमियों को मजबूत किया जाए, तभी यह उद्योग अपनी पूरी क्षमता के साथ देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकेगा.

इतिहास

इतिहास की बात करें तो पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग की जड़ें आजादी के बाद के दौर में मिलती हैं, जब पाकिस्तान के मुल्तान समेत कई इलाकों से बुनकर यहां आकर बसे. उन्होंने हाथ से दरी और चादरें बनाकर काम शुरू किया और धीरे-धीरे यह उद्योग पूरे देश और फिर विदेशों तक फैल गया. यही मेहनत आज पानीपत को टेक्सटाइल हब के रूप में स्थापित करती है.

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Sanjucta Pandit
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मेरा नाम संजुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पद पर 3 साल से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करू और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.