सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, हाईकोर्ट ने चिकित्सा बिलों के निपटान की समय- सीमा की निर्धारित

चंडीगढ़ | पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों में सालों तक होने वाली देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन के साथ- साथ सभी बोर्डों और निगमों को निर्देश दिया कि वे चिकित्सा बिलों से जुड़े दावों का निपटारा अधिकतम 2 महीने के भीतर करें. यदि तय समय- सीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित विभागों को 9% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा.

HIGH COURT

सरकारी कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति कोई ‘कृपा’ नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है, जिसे समय पर दिया जाना अनिवार्य है. कोर्ट ने यह भी माना कि लंबे समय तक फाइलों को एक से दूसरे विभाग में घुमाने की प्रवृत्ति ने कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी में डाला है.

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हाईकोर्ट ने निर्धारित की समय- सीमा

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक ऐसा उदाहरण आया, जिसमें एक महिला को अपने पति के इलाज पर खर्च किए गए पैसे की प्रतिपूर्ति के लिए करीब 16 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा. इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इतनी लंबी देरी न केवल अनुचित है बल्कि इससे चिकित्सा सहायता का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सरकार या उसके विभाग अपनी सुविधा के अनुसार अनिश्चितकाल तक निर्णय लंबित नहीं रख सकते.

अपने आदेश के अंत में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए कि इस फैसले की प्रति पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन सहित सभी संबंधित बोर्डों और निगमों को भेजी जाए ताकि इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.