चंडीगढ़ | राजधानी चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाले जहरीले लीचेट को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने इस परियोजना के लिए एजेंसी का चयन कर लिया है. करीब 3 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए 2 कंपनियों ने बोली लगाई थी. इनमें से 2.52 करोड़ रुपए की सबसे कम बोली को मंजूरी दी गई है. अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को जल्द कार्य आवंटित कर दिया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा.

परियोजना के तहत, डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की परिधि के साथ 1.32 किलोमीटर लंबी दो नई ड्रेनेज लाइनें बनाई जाएंगी. इन ड्रेनेज लाइनों का मुख्य उद्देश्य कचरे के पहाड़ से निकलने वाले जहरीले लीचेट को आसपास के क्षेत्रों में फैलने से रोकना और उसे व्यवस्थित रूप से एकत्र करना है.
सड़कों के किनारे विकसित
ये नई ड्रेनेज लाइनें डंपिंग ग्राउंड से सटी दो प्रमुख सड़कों के किनारे विकसित की जाएंगी. इनमें धनास मार्बल मार्केट और न्यू चंडीगढ़ की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग तथा पटियाला की राव के साथ मालोया जाने वाली सड़क शामिल है. इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन और भारी ट्रक गुजरते हैं. नगर निगम इससे पहले डंपिंग ग्राउंड के उस हिस्से में पहली ड्रेनेज लाइन का निर्माण कर चुका है जो रिहायशी सेक्टर की ओर स्थित है. अब बाकी 2 दिशाओं में भी ड्रेनेज नेटवर्क तैयार होने के बाद डंपिंग ग्राउंड की तीनों सीमाओं से निकलने वाले लीचेट को एकत्र कर सीधे लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (एलटीपी) तक पहुंचाया जाएगा.
बुनियादी ढांचे को नुकसान
डंपिंग ग्राउंड से रिसने वाला दूषित पानी आसपास की सड़कों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है और लंबे समय में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में इस पानी को नियंत्रित करना और उसका वैज्ञानिक तरीके से उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है. नई ड्रेनेज लाइन बनने के बाद पर्यावरणीय जोखिम कम होंगे. साथ ही, सड़कों की सुरक्षा और मजबूती बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.