ज्योतिष डेस्क | साल 2026 की शुरुआत फरवरी और मार्च में ग्रहण के साथ हुई थी. अब अगस्त में भी दो अलग- अलग तिथियों पर सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने जा रहे हैं. ज्योतिष के अनुसार, एक ही महीने में दो ग्रहण होना महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे बड़े बदलावों व ऊर्जा परिवर्तन से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इनका प्रभाव हर देश और क्षेत्र में अलग- अलग हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अगस्त 2026 के दोनों ग्रहण भारत में दिखाई देंगे और क्या इनका सूतक काल मान्य होगा.

साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.
सूतक काल मान्य नहीं
इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण सबसे पहले उत्तरी रूस में दिखाई देगा. इसके बाद स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में नजर आएगा. वहीं, यूरोप के अधिकांश देशों, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी भाग और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में आंशिक रूप से देखा जा सकेगा. साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा. यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो शनि की राशि कुंभ और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा. ग्रहण की शुरुआत सुबह 6:53 बजे होगी और इसका समापन दोपहर 12:31 बजे होगा.
यह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा. इसी वजह से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा. यह ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई देशों में दिखाई देगा.
भारत में नहीं रहेगा प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य या चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तब उसका सूतक काल लागू नहीं होता और सामान्य रूप से धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव भी मान्य नहीं माना जाता इसलिए अगस्त 2026 के दोनों ग्रहण भारत में दृश्य न होने के कारण यहां सामान्य दिनचर्या और धार्मिक गतिविधियों पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं रहेगा.