ज्योतिष डेस्क | सावन के सभी सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं. इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत मन को संयमित करता है, आत्मबल बढ़ाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है. कई श्रद्धालु इसी महीने से 16 सोमवार व्रत की शुरुआत भी करते हैं. इस बार सावन में दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं. पहला 10 अगस्त. सोम प्रदोष और दूसरा 25 अगस्त. भौम प्रदोष.

धार्मिक मान्यता है कि सावन के प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, दान तथा मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. इसे कर्म दोषों से मुक्ति का भी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है.
सावन शिवरात्रि
11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी. इसी दिन कांवड़ यात्रा पूरी कर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि इस रात्रि में व्रत, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ध्यान करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है. सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. इस वर्ष इसकी तिथियां हैं-
- 4 अगस्त
- 11 अगस्त
- 18 अगस्त
- 25 अगस्त
महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण
यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है. 17 अगस्त को नाग पंचमी का व्रत रखा जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग देवता भगवान शिव के प्रिय हैं. इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है. कई परंपराओं में इसे पितृ दोष की शांति और परिवार की समृद्धि से भी जोड़ा जाता है.
इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के इन सभी व्रतों को श्रद्धा, संयम और विधि- विधान के साथ करने से आध्यात्मिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है. व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखें और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Haryana E Khabar किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।