नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली- एनसीआर को न्यूनतम उत्सर्जन क्षेत्र (Low Emission Zone) बनाने की तैयारी तेज हो गई है. इसी योजना के तहत, दिल्ली की सीमाओं के 156 प्रवेश द्वारों और 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे. डिजिटल टोलिंग, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने व्यावसायिक वाहनों को हटाने और चरणबद्ध तरीके से शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने की योजना भी तैयार की गई है.

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के दौरान दिल्ली में पीएम 2.5 के कुल उत्सर्जन में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों की होती है. ऐसे में वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण राजधानी की हवा को साफ करने की दिशा में सबसे अहम कदम माना जा रहा है.
दिल्ली में वाहनों पर कार्रवाई
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और राहगीरी फाउंडेशन की रिसोर्स लैब की ओर से आयोजित सेमिनार में दिल्ली-एनसीआर के लिए कम उत्सर्जन वाला रोडमैप प्रस्तुत किया गया. सीएक्यूएम के सदस्य (तकनीकी) डॉ. विरिंदर शर्मा ने बताया कि पूरे एनसीआर में लगाए जाने वाले ANPR कैमरे वाहन डेटाबेस और फास्टैग प्रणाली से जुड़े होंगे.
इनके जरिए बीएस- 1 से बीएस- 4 श्रेणी के प्रतिबंधित वाहनों की पहचान की जा सकेगी और बिना यातायात रोके पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क की वसूली भी संभव होगी. अन्य विशेषज्ञों ने सरकारी और संस्थागत वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की सिफारिश की.
होगी डिजिटल निगरानी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने बताया कि उत्सर्जन कम करने के लिए आगामी बीएस- 7 मानकों की तैयारी, एक्सप्रेसवे पर फास्टैग आधारित व्यवस्था और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर रोड टैक्स में छूट जैसी पहल की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक वाहन कुल वाहनों का केवल 3 प्रतिशत हैं, लेकिन वे लगभग 33 प्रतिशत वाहन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं.
केवल सब्सिडी से लंबे समय तक बदलाव संभव नहीं होगा. इंटरनेशनल एनर्जी ट्रांजिशन प्लेटफॉर्म की संस्थापक महुआ आचार्य ने पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बदलने का लक्ष्य तय करने पर जोर दिया.