हजारों फीट ऊपर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़? पायलट के नशे में मिलने के बाद उठे बड़े सवाल

नई दिल्ली | 4 अगस्त को फुकेट से नई दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI- 2379 में कॉकपिट के भीतर लापरवाही और मुख्य पायलट के नशे की स्थिति में मिलने के खुलासे के बाद देश में उड्डयन सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस शुरू हो गई है. हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में पायलट की एक छोटी सी गलती भी सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में डाल सकती है. ऐसे में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों और उनकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. 2022 से पहले भारत में प्री- फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर (BA) टेस्ट ही प्रमुख सुरक्षा जांच हुआ करता था.

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इसमें उड़ान से पहले मुख्य रूप से शराब के सेवन की जांच की जाती थी. हालांकि, 2013 से 2021 के बीच पायलटों के शराब के सेवन से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखी गई. अकेले 2015 में 43 पायलट उड़ान से पहले एल्कोहल टेस्ट में पॉजिटिव मिले थे.

2024 में कई पायलट

ऐसे मामलों को रोकने और शराब के अलावा अन्य नशीले पदार्थों (साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए वर्ष 2022 में नियमों को और कड़ा किया गया. इसके तहत रैंडम डोप टेस्ट की व्यवस्था भी लागू की गई. कड़े नियमों के बाद लापरवाह क्रू मेंबर्स के खिलाफ कार्रवाई करना आसान हुआ. 2024 में करीब 30 पायलट और 80 केबिन क्रू सदस्य जांच में फेल पाए गए थे.

मौजूदा नियमों के तहत पहली बार टेस्ट में फेल होने पर फ्लाइंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाता है. दूसरी बार उल्लंघन पर तीन साल का निलंबन और तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है. फुकेट की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए मौजूदा नियमों की निगरानी कितनी प्रभावी है.

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सामने अलग चुनौती

इस घटना ने थाईलैंड जैसे पर्यटन स्थलों से आने वाली उड़ानों में क्रू की सुरक्षा जांच को लेकर भी चिंता बढ़ाई है. थाईलैंड ने जून 2022 में गांजे को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था. इसके बाद वहां गांजा और इससे जुड़े उत्पादों की उपलब्धता बढ़ गई. बाद में सरकार ने इसके इस्तेमाल को मुख्य रूप से चिकित्सकीय उद्देश्यों तक सीमित करने के लिए नियम बनाए. एयरलाइंस के सामने चुनौती यह है कि लेओवर यानी उड़ानों के बीच रुकने के दौरान क्रू मेंबर्स के ऐसे पदार्थों के संपर्क में आने की संभावना से कैसे निपटा जाए. प्री- फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट केवल शराब की मौजूदगी पकड़ता है. गांजा या अन्य मादक पदार्थों का पता लगाने के लिए डोप टेस्ट की जरूरत होती है.

हर नियमित उड़ान से पहले सभी क्रू सदस्यों का विस्तृत डोप टेस्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है. ऐसे में रैंडम जांच, सख्त निगरानी और नियमों के प्रभावी पालन को विमानन सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है.

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Sanjukta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.