नई दिल्ली | सोशल मीडिया पर टाइम ट्रैवल को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहते हैं. कोई भविष्य में जाने की बात करता है तो कोई अतीत में पहुंचने का दावा करता है. हालांकि, इनमें से ज्यादातर दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं होता. अब ब्रिटेन के लीसेस्टर के रहने वाले लुईस वॉकर का एक पुराना दावा फिर चर्चा में है. वॉकर ने दावा किया था कि वह साल 4413 में पहुंच गया था, लेकिन वहां उसे एक भी इंसान नहीं मिला. वॉकर के मुताबिक, साल 1977 में वह ब्रिटेन के मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में काम करता था. उसके पिता ने उसे वहां नौकरी दिलाई थी.

कुछ समय बाद उसे सीक्रेट जानकारियों तक पहुंच मिलने लगी. इसी दौरान वैज्ञानिकों ने उसे बताया कि उन्होंने टाइम ट्रैवल टेक्नोलॉजी विकसित की है. वैज्ञानिक उसे करीब 600 साल आगे भेजना चाहते थे. इसके बदले उसे 2.5 लाख पाउंड देने की पेशकश की गई थी.
फंसने का खतरा
वॉकर का दावा था कि इस मिशन के सफल होने की संभावना सिर्फ 50 प्रतिशत थी. असफल होने पर अंतरिक्ष- समय में खोने या आयामों के बीच फंसने का खतरा था. पैसों की जरूरत के चलते उसने जोखिम उठाने का फैसला किया. उसके मुताबिक, उसी रात हेलीकॉप्टर से उसे इंग्लिश चैनल के नीचे बने एक गुप्त बेस पर ले जाया गया. वहां डिस्गाइज्ड बिल्डिंग, लंबी सीढ़ियों और अंडरग्राउंड टनल से गुजरने के बाद वह एक ऐसी जगह पहुंचा, जहां टेलीपोर्टेशन और माइंड रीडिंग जैसे उपकरण मौजूद थे. टाइम मशीन एक विशाल त्रिभुजाकार संरचना थी, जिसमें कई तार जुड़े हुए थे.
सब कुछ हो गया सफेद
वॉकर को रेडिएशन प्रोटेक्टिव सूट पहनाकर मशीन में बैठाया गया. तेज आवाज के बाद सब कुछ सफेद हो गया. जब उसकी आंख खुली तो वह एक खाली अस्पताल में था. रोबोटिक आवाज ने उसका नाम लेकर बताया कि वह साल 4413 में है. अस्पताल से बाहर निकलने पर उसने उड़ती कारें और सड़कों पर ह्यूमन जैसे रोबोट्स देखे. उसका दावा था कि वहां इंसान लगभग खत्म हो चुके थे. इसी दौरान उसे एक व्यक्ति मिला, जिसने खुद को 2030 का टाइम ट्रैवलर बताया. उसने कहा कि 2028 में टाइम ट्रैवल पब्लिक हो जाएगा और 4413 टाइम ट्रैवलर्स के लिए लोकप्रिय जगह होगी.
सिर्फ मौजूद थे रोबोट्स
वॉकर ने दावा किया कि इंसान लंबे समय पहले तकनीक से मर्ज हो चुके थे और अब वहां सिर्फ रोबोट्स मौजूद थे. कुछ समय बाद उसे वापस 1977 में भेज दिया गया. यह कहानी उसने 2018 में यूट्यूब चैनल एपेक्स टीवी पर सुनाई थी. वीडियो में उसका चेहरा धुंधला रखा गया था. हालांकि, वॉकर ने अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज, फोटो या स्वतंत्र सबूत पेश नहीं किया. वैज्ञानिक दृष्टि से भी टाइम ट्रैवल को लेकर ऐसा कोई प्रमाण मौजूद नहीं है. इसलिए इस कहानी को फिलहाल एक अप्रमाणित दावा ही माना जा रहा है.