ज्योतिष डेस्क | हिंदू धर्म में हरियाली तीज का पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. सावन में प्रकृति चारों ओर हरियाली से सजी होती है, इसलिए इस पर्व का नाम भी हरियाली तीज पड़ा है. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं जबकि कुंवारी लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं. हरियाली तीज पर महिलाओं के श्रृंगार में हरे रंग का विशेष महत्व होता है.

महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनने के साथ हरी चूड़ियां और मेहंदी भी लगाती हैं. कई जगह इस दिन लोकगीत गाने और झूला झूलने की भी परंपरा है. आइए जानते हैं आखिर हरियाली तीज पर हरा रंग इतना खास क्यों माना जाता है.
क्यों पहनते हरे रंग के कपड़े
धार्मिक मान्यताओं में हरे रंग को भक्ति, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा, खुशी, तरक्की, लंबी उम्र और अच्छी सेहत का प्रतीक माना गया है. हरियाली तीज का सीधा संबंध सावन और प्रकृति से भी है. इस मौसम में बारिश के बाद पेड़- पौधे और खेत हरे- भरे हो जाते हैं. ऐसे में हरा रंग प्रकृति की सुंदरता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि हरियाली तीज पर हरे रंग के वस्त्र पहनकर माता पार्वती की पूजा करने से सौभाग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में प्रेम और खुशहाली की कामना के साथ हरे रंग के कपड़े पहनती हैं.
हरियाली तीज और हरे रंग का संबंध
‘हरियाली’ का अर्थ ही हरा- भरा और समृद्ध होना है. सावन के दौरान बारिश से प्रकृति में नई जान आती है और फसलें भी हरी होने लगती हैं. ऐसे में हरियाली तीज पर हरे रंग को समृद्धि और भरपूरता से जोड़कर देखा जाता है. हरे रंग की चूड़ियां और मेहंदी भी इस पर्व के श्रृंगार का अहम हिस्सा हैं. महिलाएं हरे कपड़े पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं और माता पार्वती की पूजा करती हैं. हरे रंग को नई शुरुआत और जीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है. सावन में गर्मी से राहत मिलने के साथ प्रकृति में नया जीवन दिखाई देता है. इसी कारण हरियाली तीज पर हरे रंग को शुभ माना जाता है.
भारतीय परंपराओं में हरे रंग को प्रेम और करुणा से भी जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज पर हरा रंग पहनना भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति भक्ति और उनके अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है.
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